एंटीजन तैयार करना

पहला चरण होता है एंटीजन का निर्माण करना, जिसका इस्तेमाल किसी प्रतिरक्षी प्रतिक्रिया को प्रेरित करने के लिए किया जाता है। इस चरण में शामिल है रोगाणुओं की वृद्धि और उनका संग्रह (बाद की निष्क्रियता या किसी उप-इकाई के पृथक्करण के लिए) या उस रोगाणु से किसी रिकंम्बिनेंट प्रोटीन (ऐसा प्रोटीन जिसे डीएनए तकनीक से बनाया जाता है) का निर्माण करना। रिकंम्बिनेंट प्रोटीन का निर्माण जीवाणु कोशिकाओं या यीस्ट में कल्चर द्वारा किया जा सकता है। कोशिका कल्चर में विषाणुओं की वृद्धि होती है। एंटीजन की उपज को अनुकूलित करने और साथ ही उसकी समग्रता को बनाए रखने हेतु विकसित एक वृद्धि माध्यम (ग्रोथ मीडियम) के इस्तेमाल से जीवाणु समूह के रोगाणुओं की वृद्धि की जाती है।

कई विषाणु जनित टीकों के लिए इस प्रक्रिया की शुरुआत एक विशिष्ट प्रकार के विषाणु की अल्प मात्रा के साथ की जाती है, जिसकी कोशिकाओं में वृद्धि करवाई जा सकती है। विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं का इस्तेमाल किया जाता है, जैसे कि चूजे के भ्रूण या कोशिका रेखाओं से जो बार-बार वृद्धि करते हैं।

जीवाणुओं का विकास बायोरिएक्टर्स में किया जा सकता है, जो बहुत हद तक फर्मेंटर्स जैसे ही होते हैं। कुछ एंटीजन का निर्माण जीवाणु या यीस्ट कोशिकाओं के भीतर किया जा सकता है।

छोड़ना और पृथक करना

दूसरा चरण है कोशिकाओं से एंटीजन को छोड़ना और इसे इसकी वृद्धि के लिए प्रयुक्त पदार्थ से पृथक करना। वृद्धि माध्यम के प्रोटीन और अन्य हिस्से अभी भी मौजूद रह सकते हैं और उन्हें अगले चरण में अवश्य हटा लिया जाना चाहिए। इस चरण का लक्ष्य है जितना अधिक संभव हो उतने विषाणुओं या जीवाणुओं को मुक्त करना।

शुद्ध करना

जीवित टीके तीसरे चरण से पूर्व निष्क्रिय होते हैं। तीसरे चरण एंटीजन का शोधन होता है। ऐसे टीकों के लिए जिन्हें रिकम्बिनेंट प्रोटीन से बनाया जाता है, शोधन में क्रोमैटोग्राफी (पदार्थों को अलग लगने की एक विधि) का इस्तेमाल किया जाता है। 

मजबूत बनाना

चौथा चरण एक सहायक पदार्थ (ऐडजुवेंट) का संयोजन हो सकता है, जो एक ऐसा पदार्थ होता है जो गैरविशिष्ट रूप से प्रतिरक्षी प्रतिक्रियाओं को बढ़ाता है। टीकों में स्टैबिलाइजर्स भी शामिल हो सकते हैं, जो शेल्फ-आयु को बढ़ाते हैं या परिरक्षक पदार्थ मौजूद रह सकते हैं, जो कई-खुराक वाले वायल्स का सुरक्षित रूप से इस्तेमाल करने में मदद देते हैं।

वितरण करना

अंतिम चरण में ऐसे सभी घटक शामिल होते हैं, जिनसे अंतिम रूप से टीके का निर्माण होता है और उन्हें एकल बरतन में एकसमान रूप से मिश्रित किया जाता है। तब टीके को वायल या सिरिंग पैकेज में भरा जाता है, उसे रोगाणुमुक्त स्टॉपर या प्लंजर्स के साथ सील बंद किया जाता है और व्यापक वितरण के लिए लेबल लगाया जाता है। कुछ टीकों को जमाकर-सुखाया जाता है और इस्तेमाल के समय उसे फिर से गीला कर लिया जाता है।