रुबेला

रुबेला रोग जीनस रुबिवायरस के वायरस द्वारा होता है। रुबेला संक्रामक है लेकिन प्राय: हल्का वायरल संक्रमण होता है। हालांकि रुबेला को कभी-कभी “जर्मन खसरा” भी कहते हैं, रुबेला वायरस का खसरा वायरस से कोई संबंधित नहीं है।

दुनिया भर में, विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देशों में वर्ष 2012 में लगभग 100,000 रुबेला मामले सामने आए, हालांकि संभावित रूप से वास्तविक मामले इससे कहीं अधिक हैं। 2012 में सबसे अधिक मामलों वाले देश थे टिमोर-लेस्ट, मेसिडोनिया, थाइलैंड, ताजिकिस्तान, और सीरिया। 

लक्षण

रुबेला के लक्षणों में शामिल हैं कम बुखार, मिचली और प्रमुख रूप से गुलाबी या लाल चकत्तों के निशान जो लगभग 50-80% मामलों में उत्पन्न होते हैं। चकत्ते प्राय: चेहरे पर निकलते हैं, नीचे की ओर फैलते हैं और 1-3 दिनों तक रहते हैं। वायरस के संपर्क में आने के 2-3 दिनों  के बाद चकत्ते निकलते हैं। सर्वाधिक संक्रामक अवधि होती है चकत्ते निकलने के 1-5 दिनों तक।

रुबेला विशिष्ट रूप से विकसित हो रहे भ्रूण के लिए खतरनाक होता है। अधिक जानकारी के लिए नीचे दिया गया खंड जटिलताएं देखें।

प्रसार

वायरस वायुजनित श्वसन के छींटों द्वारा फैलता है। संक्रमित व्यक्ति रुबेला के चकत्तों के निकलने के एक हफ्ते पहले भी, और इसके पहली बार चकत्ते निकलने के एक हफ्ते बाद तक संक्रामक हो सकते हैं। (यह बहुत ही संक्रामक होता है जब चकत्ता पहली बार निकलता है।) CRS के साथ जन्मे बच्चे एक वर्ष से अधिक समय तक दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं।

रुबेला के मामले जाड़े के अंत में या बसंत के शुरुआत में अपने चरम पर होते हैं।

उपचार और देखभाल

रुबेला का कोई प्रत्यक्ष इलाज नहीं है। बुखार कम करने के प्रयास के साथ-साथ सहयोगात्मक देखभाल प्रदान किया जा सकता है।

जटिलताएं

रुबेला प्राय: बच्चों में एक गंभीर रुग्णता नहीं है, और इसके लक्षण आमतौर पर हल्के होते हैं। रुबेला की जटिलताएं बच्चों की तुलना में वयस्कों में अधिक होती हैं, और इसमें अर्थराइटिस, एंसेफेलाइटिस, और न्युराइटिस शामिल हैं।

रोग का प्रमुख खतरा है कन्जेनिटल रुबेला सिंड्रोम (CRS). किसी महिला को गर्भावस्था के दौरान रुबेला संक्रमण होने पर, यह संक्रमण विकसित हो रहे भ्रूण तक पहुंच सकता है। ऐसी गर्भावस्थाओं को सहज गर्भपात या अपरिपक्व जन्म का जोखिम होता है। यदिभ्रूण बच जाता है, तो बच्चे को भारी रूप से जन्म संबंधी विकृतियां हो सकती है, जिसमें बहरापन, आंखों की खराबी, हृदय संबंधी समस्याएं, मानसिक मंदन, हड्डी में जख्म और अन्य असामान्यताएं हो सकती हैं। इन विकृतियों को समग्र रूप से CRS कहते हैं। जो माताएं गर्भावस्था के पहले तीन महीने के दौरान संक्रमित होती हैं, अध्ययन के मुताबिक, उनके 50% से  लेकर 90% बच्चे CRS से पीड़ित होंगे। दुनिया भर में, हर साल लगभग 100,000 बच्चे CRS के साथ जन्म लेते हैं।

उपलब्ध टीके

रुबेला का टीका एक सक्रिय दुर्बलीकृत रुबेला वायरस पर आधारित है जिसका प्रयोग 40 वर्षों से अधिक समय से किया जा रहा है। टीके की एक खुराक जीवन भर प्रतिरक्षण प्रदा कर सकती है।

टीकाकरण की अनुशंसाएं

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रुबेला टीकाकरण की अनुशंसा की है। यह उन देशों को अग्रिम रूप से रुबेला और CRS उन्मूलन हेतु RCV के प्रयोग को प्रोत्साहित करता है जहां व्यापक खसरा टीकाकरण प्रयासों का लाभ उठाने के लिए वर्तमान में रुबेला टीकाकरण का प्रयोग नहीं किया जा रहा है।

उन देशों में जहां टीका खसरा-युक्त टीका के भाग के रूप में दिया जाता है, वहां टीका प्राय: दो खुराकों में दिया जाता है, पहली खुराक 12-15 महीने की आयु में और दूसरी खुराक 4-6 वर्ष की आयु में दी जाती है। जिन देशों ने बाल्यावस्था प्रतिरक्षण अनुसूची में रुबेला के टीके को शामिल नहीं किया है, वहां छोटी बच्चियों (किशोरियों) को रुबेला का टीका दिया जा सकता है।

महिलाओं को गर्भधारण करने से पहले रुबेला प्रतिरक्षा क्षमता की जांच करा लेनी चाहिए, विशेषकर यदि वे उन देशों में जन्मी हैं जहां रुबेला टीकाकरण को नियमित नहीं चलाया गया है। यदि प्रतिरक्षा क्षमता को बनाया नहीं जा सकता, तो गर्भधारण करने के बारे में सोच रही महिलाओं को टीका लेने की सलाह दी जाती है। (रुबेला टीकाकरण उन महिलाओं के लिए नहीं है जो पहले से गर्भवती हैं, या जो चार हफ्तों के अंदर गर्भवती होने पर विचार करती हैं।)

रुबेला-युक्त टीका (RCV) रशियन फेडरेशन, यूरोप के अधिकांश देशों, चीन और एशिया के कुछ अन्य देशों, अस्ट्रेलिया, सभी उत्तर एवं दक्षिण अमेरिका, और अफ्रीका के कुछ देशों में राष्ट्रीय प्रतिरक्षण कार्यक्रम का भाग है। वर्ष 2015 तक के आंकड़ों के मुताबिक, 140 देश, दुनिया  भर के कुल जन्म संख्याओं के 46% को प्रस्तुत करते हुए, अपने राष्ट्रीय प्रतिरक्षण कार्यक्रमों में RCV का प्रयोग करते हैं।


स्रोत

सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन। Rubella. Epidemiology and Prevention of Vaccine-Preventable Diseases. Atkinson W, Wolfe S, Hamborsky J, eds. 13th ed. Washington DC: Public Health Foundation, 2015. 20/3/2017 को प्रयुक्त।

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अंतिम अपडेट 20 मार्च 2017