टीका विकास में ह्युमैन सेल स्ट्रैंस

नोट: शब्दावलीसेल स्ट्रैनऔरसेल लाइनका प्रयोग कभी-कभी विनिमेयता के रूप में किया जाता है। इस लेख में, “सेल स्ट्रैनका प्रयोग कोशिका के एकल प्रकार के संवर्धन का वर्णन करने के लिए किया जाता है; “सेल लाइनका प्रयोग कोशिका के एकल प्रकार के चिरस्थायी संवर्धन - अर्थात, जो अनंतकाल तक पुनरावृत करता है, का वर्णन करने के लिए किया जाता है।

1800 के दशक के उत्तरार्ध में बछड़ों से काउपॉक्स वायरस पैदा करने के लिए वैक्सिन फार्म्स की स्थापना काल से मानव टीकों के निर्माण में पशुओं का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इस बिंदु से, और 20वीं शताब्दी के पूर्वार्ध तक, पशुओं के इस्तेमाल के साथ, या तो जीवित पशुओं में पैथोजन की वृद्धि द्वारा या जंतु कोशिकाओं के प्रयोग द्वारा अनेक टीकों का विकास जारी रहा।

यद्यपि इस विधि से, टीका विकास में पशुओं विशेषकर जीवित पशुओं के इस्तेमाल से, अनेक टीकों और एंटी-टॉक्सिन उत्पादों का सफल निर्माण किया गया, लेकिन वे आदर्श नहीं हैं। पशुओं पर शोध महंगे होते हैं और बहुत अधिक निगरानी की जरूरत होती है, उनेक स्वास्थ्य को बनाए रखना और शोध की सतत व्यवहार्यता सुनिश्चित करना दोनों कठिन होता है। उनमें दूसरे जीवाणु या वायरस हो सकते हैं जो अंतिम टीका को संदूषित कर सकते हैं, जैसा कि पोलियो टीका, जिसे बंदर की कोशिकाओं से तैयार किया गया था, 20वीं शताब्दी के मध्य में आखिरकार बंदर के वायरस, SV40, या सिमिअन वायरस 40 पाया गया। (अच्छी बात यह थी कि, ये वायरस मनुष्यों के लिए हानिकारक नहीं थे।) इसके अलावा, कुछ पैथोजन जैसे चेचक के वायरस साधारण रूप से जंतु कोशिकाओं में ठीक से वृद्धि नहीं करते। 

यहां तक कि पशु उत्पादों द्वारा न कि जीवित पशु द्वारा टीका तैयार किए जाने पर - जैसे मुर्गी के अंडों में इन्फ्लुएंजा टीका वायरस की वृद्धि - इसमें पशु उत्पादों की उलब्धता में गिरावट आने से बाधा उत्पन्न हो सकती है या यहां कि यह बंद भी हो सकता है। यदि अंडे देने वाली मुर्गियों में कोई बीमारी हो जाए, उदाहरण के लिए वे बहुत कम अंडे देने लगें जिसका इस्तेमाल मौसमी इन्फ्लुएंजा टीका के निर्माण में किया जाता है, तो टीका में भारी कमी आ सकती है। (यह एक आम गलतफहमी है कि इन्फ्लुएंजा टीकों का निर्माण मुर्गियों के अविकसित अंडे के इस्तेमाल से निर्माण की तुलना में कोशिका संवर्धन में वृद्धि किए जाने पर बहुत तेजी से हो सकता है। दरअसल, कोशिका संवर्धन में टीका वायरस की वृद्धि में लगभग उतना ही समय लगता है। हालांकि, कोशिका संवर्धनों की संभावित उपलब्धता की समस्या मुर्गी के अंडों की तरह नहीं होती।)

इन कारणों से और अन्य कारणों से, ह्युमैन सेल स्ट्रैंस में टीका वायरस का निर्माण करने के लिए कोशिका संवर्धन का इस्तेमाल टीका विकास में एक महत्वपूर्ण प्रगति है।

कोशिका संवर्धन कैसे काम करता है

कोशिका संवर्धन में कल्चर डिश में कोशिकाओं का विकास शामिल होता है, जिसके लिए प्राय: सहयोगी वृद्धि माध्यम जैसे कोलाजेन का इस्तेमाल किया जाता है। प्राथमिक  कोशिका संवर्धन में कोशिका सीधे जीवित ऊतक से लिया जाता है, और इसमें अनेक प्रकार की कोशिकाएं शामिल हो सकती हैं जैसे फाइब्रोब्लास्ट्स, एपिथेलियल, औअर एंडोथेलियल कोशिकाएं।

सेल स्ट्रैंस, हालांकि, को एक ऐसे संवर्धन के लिए तैयार किया जाता है जिसमें केवल एक प्रकार की कोशिका निहित होती है। यह केवल एक प्रकार की कोशिका के बचे रह जाने तक मूल संवर्धन से उप-संवर्धनों को लेकर किया जाता है। प्राथमिक संवर्धनों को कई अलग-अलग तरीकों से रूपांपरित किया जा सकता है ताकि कोशिकाओं के एकल प्रकार को अलग किया जा सके; उदाहरण के लिए, किसी सेंट्रिफ्यूज में संवर्धन को घुमाने से बड़ी कोशिकाओं से छोटी कोशिकाओं को अलग किया जा सकता है। अंत में, जब एकल प्रकार की कोशिका बची रह जाती है, तब शोधकर्ता एक सेल लाइन बनाने की तैयारी कर सकते हैं। सेल लाइंस में लगातार प्रेक्षण और नियंत्रण संभव है जो कि बड़े ऊतक संवर्धनों में संभव नहीं है जिनमें अनेक प्रकार की कोशिकाएं मौजूद होती हैं। 

सेल लाइंस की हायफ्लिक लिमिट हो सकती है, यह एक नियम है जिसका नाम शोधकर्ता लियोनार्ड हायफ्लिक के नाम पर रखा गया। हायफ्लिक तय किया कि सामान्य कोशिकाओं की आबादी को उन्हें प्रजनन करने के लिए छोड़ने से पहले एक निश्चित बार की प्रजनन कराया जाएगा। हालांकि, हायफ्लिक की खोज के विपरीत, कुछ सेल लाइन को इमोर्टलाइज किया जा सकता है: अर्थात कोशिकाओं में कुछ परिवर्तन किए गए जिससे वे उन्हें अनगिणत बार प्रजनन कर सकते हैं। इसका एक उदाहरण है तथाकथित हेला (HeLa) सेल लाइन, जिसकी शुरुआत अमेरिका की हेनरिएट लैक्स नाम की महिला से 1950 के दशक में सर्विकल कैंसर कोशिकाओं से हुई।

सेल स्ट्रैंस और सेल लाइंस के प्रयोग से, शोधकर्ता किसी विशेष प्रकार की कोशिका में ह्युमैन पैथोजन जैसी वायरस तैयार कर सकते हैं ताकि वे उन्हें दुर्बल किया जा सके अर्थात कमजोर किया जा सके। एक ओर वायरस को टीकों में इस्तेमाल के लिए अपनाया है दूसरी ओर उन्हें बदला जाता है ताकि वे मानव शरीर में ठीक से वृद्धि न कर पाए। उदाहरण के लिए, इसे संवर्धन में रखी मान कोशिकओं में वायरस को शरीर के सामान्य तापमान से कम तापमान पर बार-बार वृद्धि कराने द्वारा किया जाता है। प्रतिकृति को नियंत्रित बनाए रखने के लिए, कम तापमान पर बेहतर वृद्धि करने वाले वायरस का प्रयोग किया जाता है, इसलिए शरीर के सामान्य तापमान पर इसकी ठीक से वृद्धि करने की मूल क्षमता खत्म हो जाए। बाद में, जब इसका इस्तेमाल टीका में होता है और सामान्य तापमान पर मानव शरीर में डाला जाता है, तब भी यह प्रतिरक्षण की प्रतिक्रिया को ललकारता है लेकिन बीमारी का रूप धारण करने जितना पर्याप्त रूप से प्रतिकृति नहीं बना पाता।

ह्युमैन सेल स्ट्रैंस के प्रयोग से विकसित टीके

ह्युमैन सेल स्ट्रैंस के प्रयोग से विकसित पहला टीका रुबेला का टीका था जिसका निर्माण स्टैनली प्लॉटकिन द्वारा युनाइटेड स्टेट्स के फिलाडेल्फिया में विस्टर इंस्टीच्यूट में किया गया था।

वर्ष 1941 में, अस्ट्रेलियाई नेत्र-विशेषज्ञ (ऑप्थैमालजिस्ट) नॉरमैन ग्रेग ने पहली बार यह महसूस किया कि बच्चों में पैदायशी कैटेरैक्ट होने का कारण गर्भावस्था के दौरान उनकी मांओं का रुबेला से संक्रमित होना था। कैटेरैक्ट के साथ-साथ, अंततोगत्वा यह भी निर्धारित किया गया कि कन्जेनिटल रुबेला सिंड्रॉम (CRS) के कारण बहरापन, हृदय रोग, मस्तिष्ककोप (एन्सेफलाइटिस), मानसिक मंदन, और न्युमोनिया साथ ही अनेक अन्य विकृतियां उत्पन्न हो सकती है। रुबेला महामारी के चरम पर, जो यूरोप में शुरू हुआ और 1960 के दशक के मध्य में अमैरिका में प्रसारित हुआ, प्लॉटकिन ने आकलन किया कि फिलाडेल्फिया के एक हॉस्पिटल में हुए जन्मों का 1% जन्म कन्जेनिटल रुबेला सिंड्रॉम से प्रभावित हुआ था। कुछ मामलों में, जो महिलाएं गर्भावस्था के दौरान रुबेला से संक्रमित थीं उन्होंने CRS के गंभीरी जोखिमों के कारण अपनी-अपनी गर्भावस्थाएं खत्म कर लीं।

इस गर्भपात के बाद, भ्रूण को प्लॉटकिन के की प्रयोगशाला में भेजा गया जहां वे रुबेला शोध के समर्पित थे। भ्रूण की किडनी का परीक्षण करने पर प्लॉटकिन ने इसमें रुबेला वायरस पाया और इसे अलग कर दिया। दूसरी ओर अलग से, लियोनार्ड हायफ्लिक (वे भी इसी समय विस्टर इंस्टीच्यूट में काम कर रहे थे) ने गर्भपात किए हुए भ्रूण के फेफड़े की कोशिकाओं के प्रयोग से एक सेल स्ट्रैन विकसित किया। परिणामी सेल स्ट्रैन में रुबेला सहित अनेक वायरस की अच्छी वृद्धि हुई और इससे संदूषणों से रहित होने की स्थिति साबित हुई। स्ट्रैन को आखिरकार WI-38 कहा गया। 

प्लॉटकिन ने रुबेला वायरस को वृद्धि कराया जिसे उन्होंने WI-38 कोशिका में अलग किया था और 86°F (30°C) पर रखा था, ताकि यह आखिरकार शरीर के सामान्य तापमान पर बहुत धीमी गति से वृद्धि कर सके। (उन्होंने पोलियोवायरस को दुर्बल बनाने के पिछले अनुभव को ध्यान में रखते हुए कम तापमान रखने का फैसला किया।) वायरस के कम तापमान पर कोशिकाओं के जरिए 25 गिना वृद्धि कर जाने के बाद, इससे अधिक गुणित नहीं हो सका जिससे कोई जीवित व्यक्ति बीमा हो जाए, लेकिन यह अभी भी एक सुरक्षात्मक प्रतिरक्षा प्रक्रिया को लालकारने में सक्षम था। अमेरिका में आज भी संयुक्त MMR (खसरा, गलसुआ, और रुबेला) के भाग के रूप में रुबेला के टीका का इस्तेमाल किया जाता है।

ह्युमैन सेल कल्चर्स (मानव कोशिका संवर्धन) के नैतिक मुद्दे

इसका इस्तेमाल 30 वर्षों से अधिक समय तक नहीं होने के बादजूद भी, बत्तख भ्रूण कोशिकाओं और कुत्ते की किडनी कोशिकाओं के प्रयोग से निर्मित टीकों के पक्ष में प्लॉटकिन के रुबेला का टीका को कुछ क्षेत्रों में शुरुआती रूप से अनदेखा कर दिया गया था। 1960 के दशक के उत्तरार्ध में, देश में इस बात की चिंता थी कि ह्युमैन सेल लाइन के प्रयोग से निर्मित टीका किसी दूसरे पैथोजन से संदूषित हो सकता है, हालांकि ऐसा नहीं लगता कि इस चिंता के पीछे कोई प्रलेखित साक्ष्य है। दशक के शुरुआत में हुई खोज के आलोक में एक रोचक तथ्य है कि जंतु कोशिकाओं से निर्मित पोलियो के टीके एक सिमिअन वायरस से संदूषित थे, जो अनेक कारणों में से एक कारण था जिससे शोधकर्ताओं ने ह्युमैन सेल लाइंस का इस्तेमाल पहले स्थान पर करना आरंभ कर दिया।

प्लॉटकिन के वैक्सीन को पहली बार 1970 में यूरोप में लाइसेंस मिला था, तथा एक मजबूत सुरक्षा प्रोफ़ाइल और उच्च प्रभावकारिता के साथ वहां व्यापक रूप से उपयोग किया गया था।  दूसरे दो रूबेला वैक्सीनों के साथ उस डेटा और बड़े साइड इफेक्ट प्रोफाइल के प्रकाश में, यह संयुक्त राज्य अमेरिका में 1979 में लाइसेंस प्राप्त हुआ था और रूबेला वैक्सीन घटक को बदल दिया गया था जिसे पहले एमएमआर (खसरा, मल, रुबेला) संयोजन वैक्सीन में इस्तेमाल किया गया था I आज, ज्यादातर देशों में उनके टीकाकरण कार्यक्रम में रूबेला वैक्सीन शामिल होते हैं प्लॉटकिन के रूबेला घटक I 2015 में रूबेला को अमेरिका से समाप्त घोषित किया गया था।.

जिन समूहों ने गर्भपात पर आपत्ति जताई थी, वे वर्षों तक प्लॉटकिन के रुबेला के टीका (और समान ह्युमैन सेल स्ट्रैंस से निर्मित अन्य टीके) के बारे में नैतिक सवाल उठाते रहे।

गर्भपात पर इसकी स्थिति के कारण, भ्रूण जैसी कोशिकाओं के साथ आरंभ हुए सेल लाइन के प्रयोग से निर्मित टीकों के इस्तेमाल पर कैथोलिक चर्च के सदस्यों से इनके नैतिक मार्गदर्शन का निवेदन किया गया। इसमें रुबेला के प्रति टीका और साथ ही चेचक और हेपाटाइटिस A के प्रति अन्य टीके, और रेबीज और गलसुआ के कुछ टीके शामिल हैं। नेशनल कैथोलिक बायोएथिक सेंटर के अनुसार आधिकारिक स्थिति यह है कि लोगों को, जब भी संभव हो, इन सेल स्ट्रैंस से निर्मित टीकों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। हालांकि, वैसी स्थिति में जहां किसी विशेष रोग के लिए एकमात्र टीका उपलब्ध हो जो इस विधि से निर्मित तो, NCBC का कहना है :

गर्भपात से इसके ऐतिहासिक संबंध पर ध्यान दिए बिना इसका इस्तेमाल नैतिक रूप से स्वतंत्र है। कारण है लोगों के स्वास्थ्य के प्रति जोखिम, यदि कोई व्यक्ति टीका नहीं लेना चाहता है, टीका की उत्पत्ति के बारे में उचित चिंता से अधिक महत्वपूर्ण है। यह खासकर उन अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण है जिनके ऊपर अपने बच्चों और आसपास के लोगों के जीवन और स्वास्थ्य की सुरक्षा की नैतिक जिम्मेदारी है। 

NCBC का कहना है कि कैथोलिक्स को फार्माश्युटिकल कंपनियों को भविष्य में इन सेल स्ट्रैंस के इस्तेमाल के बिना टीकों के निर्माण के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। टीकों के वास्तविक अवयवों के रूप में बची हुई भ्रूण संबंधी कोशिकाओं की चिंताओं का समाधान करने के लिए, हालांकि, उनका विशेष रूप से यह कहना है कि भ्रूण संबंधी कोशिकाओं का इस्तेमाल केवल सेल स्ट्रैंस को शुरू करने के लिए किया गया था जिनका प्रयोग टीका वायरस तैयार करने में किया गया था:

संतति कोशिकाएं माध्यम होती हैं जिनमें इन टीकों को तैयार किया जाता है। विचाराधीन सेल लाइंस में लगभग 40 वर्ष पहले एक या एक से अधिक गिराए गए भ्रूणों से ली गई कोशिकाओं का इस्तेमाल आरंभ हो गया था। उस समय से सेल लाइंस की वृद्धि स्वतंत्र रूप से की गई। यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि संतति कोशिकाएं गिराए गए बच्चों की कोशिकाएं नहीं होतीं। वे कभी भी स्वयं को पीड़ित के शरीर का एक अंग नहीं बनाती हैं।

कुल मिलाकर केवल दो भ्रूणों, दोनों को माता की इच्छा द्वारा किए गए गर्भपात से लिए गए थे, से सेल स्ट्रैंस का निर्माण जिसका इस्तेमाल टीका के विकास में किया गया। टीके के निर्माण के उद्देश्य से कोई भी गर्भपात नहीं किया गया था।

ह्युमैन सेल स्ट्रैंस के प्रयोग से विकसित मौजूदा टीके

वर्तमान में उपलब्ध टीकों के निर्माण के लिए दो मुख्य ह्युमैन सेल स्ट्रैंस का इस्तेमाल किया गया, प्रत्येक स्थिति में 1960 के दशक में प्राप्त विवादास्पद मूल भ्रूण संबंधी कोशिका से। WI-38 सेल स्ट्रैन का निर्माण अमेरिका में 1961 में किया गया था, और MRC-5 सेल स्ट्रैन (भ्रूण संबंधी लंग्स सेल्स के साथ शुरु करते हुए भी) का निर्माण युनाइटेड किंगडम में 1965 में किया गया था। दोनों सेल स्ट्रैंस को बनाए रखने के लिए किई भी नए या अतिरिक्त भ्रूण संबंधी कोशिकाओं की जरूरत नहीं होती है।

नीचे बताए गए टीकों का निर्माण या तो WI-38 या MRC-5 सेल स्ट्रैंस के प्रयोग से किया गया था।

·       हेपाटाइटिस A टीका [VAQTA/Merck, Havrix/GlaxoSmithKline, और Twinrix/GlaxoSmithKline] के भाग

·       रुबेला का टीका [MERUVAX II/Merck, MMR II/Merck का भाग, और ProQuad/Merck]

·       छोटी चेचक (चेचक) टीका [Varivax/Merck, और ProQuad/Merck] का भाग

·       जोस्टर (एक प्रकार का चर्म रोग) टीका [Zostavax/Merck]

·       एडेनोवायरस टाइप 4 और टाइप 7 ओरल टीका [Barr Labs] *

·       रेबीज का टीका [IMOVAX/Sanofi Pasteur] *

*नियमित रूप से नहीं दिया गया टीका

वर्तमान में उपलब्ध बहुत से टीकों का निर्माण जंतु सेल लाइन, प्राथमिक रूप से अफ्रीकी हरे बंदरों से ली गई कोशिकाओं के प्रयोग से किया गया था। इनमें शामिल हैं जापानी एन्सेफलाइटिस, रोटावायरस, पोलियो, और स्मॉलपॉक्स के टीके। 


स्रोत और अतिरिक्त पठन सामग्री 

Alberts B, Johnson A, Lewis J, et al. Molecular Biology of the Cell. 4th edition. New York: Garland Science; 2002.

Barr Labs. Package Insert - Adenovirus Type 4 and Type 7 Vaccine, Live, Oral. 2011. (179 KB) 31/3/2017 को प्रयुक्त।

सेंटर्स फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन । Elimination of rubella and congenital rubella syndrome--United States, 1969-2004MMWR Morb. Mortal. Wkly. Rep. 2005. 54 (11): 279-82. 31/3/2017 को प्रयुक्त।

GlaxoSmithKline. Package Insert – Havrix. 2011. (123 KB). 31/3/2017 को प्रयुक्त।

GlaxoSmithKline. Package Insert – Hepatitis A Inactivated & Hepatitis B (Recombinant) Vaccine. 2011. (332 KB). 31/3/2017 को प्रयुक्त।

Lindquist JM, Plotkin SA, Shaw L, Gilden RV, Williams MLCongenital rubella syndrome as a systemic infection: studies of affected infants born in Philadelphia, USA. Br Med J 1965;2:1401-6.

Merck & Co, Inc. Package Insert – Measles, Mumps, and Rubella Virus Vaccine Live. 2009. (196 KB). 31/3/2017 को प्रयुक्त।

Merck & Co, Inc. Package Insert – MERUVAX II. 2006. (88.6 KB). 31/3/2017 को प्रयुक्त।

Merck & Co, Inc. Package Insert – Refrigerator-Stable Formulation – ProQuad. 2010. (448 KB). 31/3/2017  को प्रयुक्त।

Merck & Co, Inc. Package Insert – VAQTA – Hepatitis A Vaccine, Inactivated. 2011.  (332 KB).31/3/2017 को प्रयुक्त।

Merck & Co, Inc. Package Insert – Varivax (Frozen). 2010. (220 KB). 31/3/2017 को प्रयुक्त।

Merck & Co, Inc. Package Insert – Zostavax. 2011. (159 KB). 31/3/2017 को प्रयुक्त।

National Catholic Bioethics Center. FAQ on Vaccines. 2006. 31/3/2017 को प्रयुक्त।

Plotkin SA. The History of Rubella and Rubella Vaccination Leading to Elimination. Clin Infect Dis.2006 43 (Supplement 3): S164-S168.

Plotkin SA, Orenstein WA, Offit PA, eds. Vaccines. Philadelphia: Saunders; 2008.

Sanofi Pasteur. Package Insert – ACAM2000. 2009. (285 KB). 14 जून 2016 को प्रयुक्त।

Sanofi Pasteur. Package Insert – IMOVAX. 2013. (213 KB). 31/3/2017 को प्रयुक्त।

Sgreccia E. Statement from the Pontifical Academy for Life, including English translation of “Moral Reflections on Vaccines Prepared from Cells Derived from Aborted Human Foetuses.” 2005. 31/3/2017 को प्रयुक्त।

 

PDFs पढ़ने के लिए, Adobe Reader डाउनलोड करें और इंस्टॉल करें।

 

अंतिम अपडेट 31 मार्च 2017