किशोरावस्था में दिए जाने वाले टीके

माता-पिता अपने शिशुओं और बच्चों को नवीन अनुशंसित प्रतिरक्षण दिलाते रहते हैं, जिसके लिए वे स्वास्थ्य क्लिनिक्स का दौरा करते हैं या सामुदायिक टीकाकरण अभियानों में भाग लेते हैं। किशोर बच्चों को भी टीकों की आवश्यकता होती है, पर छोटे बच्चों की तरह बार-बार स्वास्थ्य क्लिनिक्स में नहीं जाते। इस कारण से माता-पिताओं के लिए यह चुनौतिपूर्ण हो जाता है कि वे अपने बड़े बच्चों को भी उनकी जरूरत के टीके दिलवाएं। नीचे ऐसे टीके बताए जा रहे हैं, जिनकी किशोरों के लिए अनुशंसा की जाती है।

टिटनस-निहित टीका

ज्यादातर बच्चों को डिप्थीरिया, टिटनस और कुकरखांसी (DTP) का टीका 4-6 वर्ष की आयु तक दे दिया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन शुरुआती किसोरावस्था में टिटनस और डिप्थीरिया के प्रतिरक्षण (Td) की एक बूस्टर ख़ुराक की अनुशंसा करता है। यह प्रतिरक्षण किशोरावस्था में टिटनस और डिप्थीरिया से सुरक्षा करता है।

टिटनस एक केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का ऐसा रोग होता है जो बैक्टीरियम क्लॉस्ट्रिडियम टेटानी द्वारा स्रावित एक विष से उत्पन्न होता है। इस रोग के आरंभिक लक्षणों में शामिल है (इसके शारीरिक प्रभावों में सबसे आसानी से नजर पर आने वाले) शरीर में अकड़न और सूजन की समस्या। बाद में उभरने वाले लक्षणों में शामिल होते हैं तीव्र पेशी स्पैज्म, मिर्गी जैसे लक्षण और तीव्र तंत्रिका तंत्र समस्याएं। 10% से 25% टिटनस से रोगी की मौत हो जाती है।

टिटनस एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलता है। जबकि, टिटनस का फैलाव तब होता है, जब टिटनस का जीवाणु किसी घायल त्वचा और अंदर के ऊतकों में प्रवेश करता है। हैरानी की बात यह है, कि टिटनस का संक्रमण किसी बड़े जख्म की तुलना में छोटे जख्म से ज्यादा होता है, बल्कि इसका कारण है कि छोटे जख्मों की तुलना में बड़े जख्मों की अधिक सावधानीपूर्वक देखभाल की जाती है और उसे साफ रखा जाता है।

डिप्थीरिया एक विरल रोग है जो कभी बच्चों के लिए जानलेवा रोग बना हुआ था। यह रोग कॉरीनेबैक्टीरियम डिप्थीरिया नामक जीवाणु से पैदा होता है। डिप्थीरिया के प्रारंभिक लक्षण सामान्य जुकाम जैसे होते हैं। उनमें शामिल हैं गले की खराश, भूख की कमी और बुखार आना। रोग के बढ़ने पर डिप्थीरिया के संक्रमण के सबसे स्पष्ट लक्षण उभर सकते हैं: एक मोटा धूसर पदार्थ जिसे छद्म-झिल्ली कहते हैं, नासिका ऊतकों, टॉन्सिल्स, कंठ, और ग्रसनी पर जम सकती है। यह स्तर उत्तकों से चिपक जाता है और ये सांस लेने में बाधा पैदा कर सकता है।

मेनिंजोकोकल टीका

WHO ऐसे किरोशों के लिए मेनिंजोकोकल कंजुगेट या पॉलीसेकराइड टीका की अनुशंसा करता है, जिनमें मेनिंजोकोकल रोग के होने की संभावना काफी अधिक रहती है। इसमें ऐसे किशोर शामिल हो सकते हैं जो ऐसे क्षेत्रों में रहते हों जहां मेनिंजोकोकल रोग की महामारी देखी गई हो अथवा ऐसे किशोर जिनमें कुछ ऐसी स्वास्थ्य दशाएं होती है जिनसे वे मेनिंजोकोकल रोग के प्रति संवेदनशील बन जाते हैं।

मेनिंजोकोकल के टीके निसेरिया मेनिंजिटाइडिस जीवाणु की कुछ किस्मों से उत्पन्न विभिन्न रोगों से रक्षा करते हैं। ये रोग साथ मिलकर मेनिंजोकोकल रोग कहलाते हैं। मेनिंजोकोकल जीवाणु रक्तप्रवाह में संक्रमण पैदा कर सकता है, मस्तिष्क की परत (मेनिंजाइटिस) में संक्रमण, न्युमोनिया, कान का संक्रमण तथा अन्य संक्रमण पैदा कर सकता है।

मेनिंगोकोकल मेनिंजाइटिस के लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, व्याकुलता और गरदन की अकड़ शामिल हैं और साथ में मिचली, उल्टी भी आ सकती है और रोशनी के प्रति संवेदनशीलता हो सकती है। मेनिंगोकोकल रक्तप्रवाह संक्रमण के लक्षणों में तेजी से बुखार चढ़ता है और चकत्ते निकलते हैं।

तेजी से फैलने वाला मेनिंगोकोकल रोग जानलेवा हो सकता है; इससे बचने वाले लोगों में स्थायी जख्म हो सकता है, जिसमें मस्तिक की क्षति, श्रवण क्षति, या अंगों का नुकसान हो सकता है।

ह्युमैन पैपिलोमावायरस का टीका

9 से 14 वर्ष की आयु की महिलाओं के लिए ह्युमैन पैपिलोमावायरस (HPV) के टीके की दो खुराकों की सलाह दी जाती है और तीन खुराकों की सलाह उन महिलाओं के लिए दी जाती है जो 15 वर्ष की आयु या अधिक की आयु में टीका श्रेणी की शुरुआत करती हैं।

ह्युमैन पैपिलोमावायरस वायरस बड़े परिवार से संबंधित होते हैं, और टीका वायरस के कुछ उन प्रकारों से सुरक्षा प्रदान करता है जो लैंगिक रूप से प्रसारित होते हैं। HPV संक्रमित अधिकांश लोगों में कोई लक्षण नहीं दिखाई देता, और वे बहुत तेजी से अपने शरीर से वायरस को हटा लेते हैं। हालांकि, कुछ लोगों में वायरस लगातार संक्रमण बनाए रखते हैं, जिसके कारण संक्रमित कोशिकाओं में परिवर्तन होता है जिससे कैंसर हो सकता है। HPVs सर्वाइकल कैंसर के मुख्य कारण होते हैं और साथ ही सुदासंबंधी, शिश्न संबंधी, मुंह और गले का कैंसर भी हो सकता है। HPV के टीके सर्वाधिक सामान्य प्रकार के कैंसरकारी HPVs के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करते हैं। लाइसेंस प्राप्त HPV का कोई टीका भी कुछ निश्चित HPVs के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करते हैं जिनसे जननांग के मस्से निकलते हैं।

HPV बहुत ही आम है: दुनिया भर में, लगभग 11.7% महिलाएं HPV से संक्रमित हैं और कुछ देशों में संक्रमण दर 41.9% है। पुरुषों के संक्रमण की दर भी लगभग समान है। वर्ष 2012 में, दुनिया भर में लगभग 266,000 महिलाओं की मृत्यु सर्वाइकल कैंसर के हुई।

इन्फ्लुएंजा का टीका

WHO ने कुछ निश्चित जोखिम समूहों के लिए मौसमी इन्फ्लुएंजा के टीकाकरण की अनुशंसा की है जैसे गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग व्यक्तियों, स्वास्थ्य सेवा कर्मचारियों और उन व्यक्तियों के लिए जिन्हें कुछ पुरानी स्वास्थ्य दशाएं होती हैं। वे गर्भवती महिलाएं जिन्हें इन्फ्लुएंजा से होने वाली गंभीर बीमारियों का बहुत खतरा होता है, वे उन देशों में इन्फ्लुएंजा के टीकाकरण के लिए उच्च प्राथमिक समूह होती हैं जहां टीका उपलब्ध होता है। गर्भवर्ती महिलाओं के टीकाकरण से न केवल उन्हें सुरक्षा मिलती है बल्कि उनके नवजात शिशुओं को भी इन्फ्लुएंजा से सुरक्षा मिलती है। टीका ली हुई गर्भवती महिलाएं इन्फ्लुएंजा एंटीबॉडीज को विकसित हो रहे भ्रूण में हस्तांतरित करती हैं, और इससे जन्म के बाद शिशु को इन्फ्लुएंजा से सुरक्षा मिलती है।

इंफ्लुएंजा का टीका इन्फ्लुएंजा वायरस के कारण होने वाली श्वसन संबंधी बीमारी से सुरक्षा प्रदान करता है। चूंकि इंफ्लुएंजा के नए स्ट्रैंस अक्सर प्रकट होते रहते हैं, इसलिए मौसमी फ्लू के टीके हर साल बदलते रहते हैं। प्रत्येक मौसम के टीके को इन्फ्लुएंजा के अनेक स्ट्रैंस के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैयार किया जाता है। इन्फ्लुएंजा का टीका अधिकांश देशों में इन्जैक्शन द्वारा लिए जाने वाले टीका के रूप में उपलब्ध है। कुछ देशों में सांस के जरिए लिए जाने वाले फॉर्मुलेशन में भी उपलब्ध है।

इन्फ्लुएंजा (साधारण रूप से इसे फ्लू भी कहते हैं) के लक्षण अचानक उभरते हैं और इसमें बुखार, कंपकंपी, खांसी, गले की खराश, दर्द महसूस होना, सिर का दर्द, और थकावट होती है। उल्टी और दस्त भी हो सकते हैं, लेकिन ये लक्षण वयस्कों की तुलना में बच्चों में अधिक प्रचलित हैं। इन्फ्लुएंजा के लक्षण प्राय: हफ्ते भर तक बने रहते हैं। इन्फ्लुएंजा से होने वाली जटिलताओं के कारण कान और साइनस का संक्रमण, न्युमोनिया, और असामान्य रूप से मौंत भी हो सकती है।

रुबेला

रुबेला प्राय: बच्चों में एक गंभीर रुग्णता नहीं है, और इसके लक्षण आमतौर पर हल्के होते हैं। रोग का प्रमुख खतरा है कन्जेनिटल रुबेला सिंड्रोम (CRS). किसी महिला को गर्भावस्था के दौरान रुबेला संक्रमण होने पर, यह संक्रमण विकसित हो रहे भ्रूण तक पहुंच सकता है। ऐसी गर्भावस्थाओं को सहज गर्भपात या अपरिपक्व जन्म का जोखिम होता है। यदि भ्रूण बच जाता है, तो बच्चे को भारी रूप से जन्म संबंधी विकृतियां हो सकती है जो CRS से संबंधित होती हैं, जिसमें बहरापन, आंखों की खराबी, हृदय संबंधी समस्याएं, मानसिक मंदन, हड्डी में जख्म और अन्य असामान्यताएं हो सकती हैं।

अनेक देशों में, रुबेला के टीके को खसरा-युक्त टीका के भाग के रूप में शुरुआती बाल्यावस्था और 4-6 वर्ष की आयु के बच्चों में दिया जाता है। जिन देशों ने बाल्यावस्था प्रतिरक्षण अनुसूची में रुबेला के टीके को शामिल नहीं किया है, वहां छोटी बच्चियों (किशोरियों) को रुबेला का टीका दिया जा सकता है।

अन्य टीके

विशेष स्वास्थ्य वाले किशोर/किशोरी कुछ निश्चित अस्वस्थ्यताओं के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं और उन्हें उनसे सुरक्षा के लिए टीकों की जरूरत होती है। उदाहरण के लिए, जिन किशोर/किशोरियों में प्रतिरक्षी तंत्र की दुष्क्रिया होती है, उन्हें न्युमोकोकल का टीका लेने की सलाह दी जाती है, क्योंकि उन्हें स्ट्रेप्टोकोकस न्युमोनिया से गंभीर बीमारी होने का खतरा होता है। कुछ निश्चित देशों में जाने से पहले कुछ टीके लेने की आवश्यकता होती है या इसकी सलाह दी जाती है। इसके अलावा, जिन किशोर/किशोरियों को शुरुआती बाल्यावस्था के दौरान दिए जाने वाले अनुशंसित टीके नहीं दिए गए हैं, उन्हें “कैच-अप” टीकाकरण की आवश्यकता हो सकती है ताकि वे पूरी तरह से सुरक्षित रह सकें।

वयस्क चरण के लिए

ज्यों-ज्यों वे वयस्कावस्था के करीब आते जाते हैं, किशोर/किशोरी अपने चिकित्सकों और अभिभावकों के साथ प्रतिरक्षण पर चर्चा करके अपनी स्वास्थ्य देखभाल करने में सक्षम हो सकते हैं। वे यह पता कर सकते हैं वे अपने शॉट्स से अद्यतन हैं या नहीं और कौन से टीके की सलाह उन्हें दी गई है। यदि वे कॉलेज जाने की योजना बनाते हैं, मिलिटरी में जाने की सोचते हैं, या नए स्वास्थ्य देखभाल कर्मी को अपनाते हैं, तो किशोर/किशोरियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अपने चिकित्सीय रिकॉर्ड में उनके टीकाकरण का पूर्व विवरण शामिल है।


स्रोत

विश्व स्वास्थ्य संगठन। Human papillomavirus vaccines: WHO position paper. October 2014 (939 KB). 18/4/2017 को प्रयुक्त।

विश्व स्वास्थ्य संगठन। Meningococcal vaccines: WHO position paper. November 2011 (1.01 MB). 18/4/2017 को प्रयुक्त।.

विश्व स्वास्थ्य संगठन। Rubella vaccine: WHO position paper. July 2011 (405 KB).  18/4/201716 को प्रयुक्त।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन। Vaccine against influenza: WHO position paper. November 2012 (1.86 KB). 18/4/2017 को प्रयुक्त।

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अंतिम अपडेट 18 अप्रैल 2017