HIV टीकों का विकास

1990 के दशक में जिस वक्त दुनिया भर में टीकाकरण के प्रयासों से अनेक संक्रामक रोगों को नियंत्रण में लाया जा रहा था, ह्युमैन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस (HIV) ने, जिसकी पहचान 1984 में हुई थी, दुनिया भर में लाखों लोगों को संक्रमित किया। 1990 से 2014 तक HIV से पीड़ित लोगों की संख्या 8 मिलियन से बढ़कर 36.9 मिलियन हो गई; HIV/अक्वायर्ड इम्यून डेफिशिएंसी सिंड्रोम (AIDS) महामारी की शुरुआत से लेकर अब तक, AIDS ने 34 मिलियन लोगों की जान ली।[1]

HIV एक प्रमुख जन स्वास्थ्य चिंता है केवल इसलिए नहीं कि इसकी रोकथाम अभी भी टीका द्वारा नहीं की जा सकी है, बल्कि इसलिए भी कि जिन्हें यह संक्रमित करता है वे एक इस वायरस से जीवन भर संक्रमित हो जाते हैं और उनकी प्रतिरक्षा क्षमता को नष्ट कर देता है जिससे वे दूसरे संक्रमणों के प्रति अधिक अरक्षित हो जाते हैं। वायरस इम्यून T हल्पर कोशिकाओं को नष्ट करता है जिन्हें CD4+ कोशिकाएं कहा जाता है, जो मानव प्रतिरक्षा क्षमता के संयोजक होते हैं। यहीं से "अक्वायर्ड इम्यून डेफिशिएंसी सिंड्रोम" का नाम रखा गया : जब HIV पर्याप्त CD4+ कोशिकाओं को नष्ट करता है, तब संक्रमित व्यक्ति की प्रतिरक्षी तंत्र उन संक्रमणों से लड़ने में भी नाकाम रहता है जिनसे वह साधारण तौर पर लड़ सकता था। जब CD4+ कोशिकाओं की संख्या एक निश्चित बिंदु से कम हो जाती है, तब व्यक्ति का HIV संक्रमण AIDS में बदल जाता है। AIDS से पीड़ित व्यक्ति अनेक प्रकार के संक्रमणों के प्रति अरक्षित हो जाते हैं, जिसमें वे संक्रमण भी शामिल होते हैं जिनसे वे आमतौर पर लड़ सकते थे, इसमें न्युमोनिया, क्षयरोग और दाद और साथ ही कुछ निश्चित कैंसर भी शामिल होते हैं।[2]

AIDS रोग के शुरुआती वर्षों में, वायरस से संक्रमित लोगों की मौंतें हुई, यहां तक कि संक्रमण के कुछ ही दिनों के अंदर। हालांकि अनेक मेडिकल और पब्लिक हेल्थ क्षेत्र ने बढ़ते संकट के लिए प्रत्यक्ष फंडिंग और शोध प्रयासों के लामबंद हुए, फिर भी राष्ट्रीय सरकार की प्रतिक्रियाएं सामान्यत: धीमी रही। HIV से पीड़ित लोगों और उनके सहयोगियों द्वारा मुखर सक्रियतावाद और साथ ही विज्ञान की दुनिया के पक्षधरों की ओर से लगातार किए गए प्रयासों के बाद देशों की सरकारें सक्रिय हुई। उन्होंने प्रभावी उपचार की आवश्यकताओं पर बल दिया, उन्होंने उपचार के विकसित होते ही प्रभावी उपचार तक उन्नत पहुंच, और HIV के साथ जी रहे व्यक्तियों के लांछन को खत्म करने के महत्व पर भी जोर दिया।

जहां एक ओर एंटीरेट्रोवायरल उपचारों ने HIV के साथ जी रहे व्यक्तियों की जीवन प्रत्याशा और जीवन की गुणवत्ता को जबरदस्त तरीके से सुधारा, वहीं HIV संक्रमण की रोकथाम एक प्राथमिक लक्ष्य है, विशेषकर उन विकासशील देशों के लिए जहां महामारी का बड़ा प्रकोप होता है और जो उपचार वहन नहीं कर सकते। HIV के टीका के निर्माण की दिशा में प्रयास करते हुए दशकों बीत गए और ये प्रयास लगातार जारी हैं।

हालांकि, यह विशेष वायरस टीका निर्माण को अनौखी चुनौती देता है।

सामान्य शब्दों में, सभी टीके एक ही तरह से काम करते हैं: वे प्रतिरक्षी तंत्र को किसी विशेष पैथोजन को की पहचान करने और उसपर हमला करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं यदि वे भविष्य में शरीर में दिखाई पड़ते हैं। यह विभिन्न तरीकों से हो सकता है: आप पैथोजन को निष्क्रिय करके (जैसा कि इंजैक्टेड पोलियो के टीके में होता है) या कमजोर करके (जैसा कि खसरे के टीके में होता है), इसके एक भाग का इस्तेमाल करके (कुकुरखांसी), या प्रतिरक्षी अनुक्रिया को बढ़ाने में मदद करने वाले किसी पदार्थ (न्युमोकोकल का टीका) के साथ मिलाकर एक टीका बना सकते हैं। किसी भी विधि के इस्तेमाल से, टीका प्रतिरक्षी तंत्र को पैथोजन के प्रति तेजी से अनुक्रिया करने के लिए प्रेरित करता है यदि यह भविष्य में कभी शरीर में प्रवेश करता है।

HIV की विचित्र चुनौतियां 

अप्रैल 1984 में, यू.एस. हेल्थ एंड ह्युमैन सर्विसेज सेक्रेटरी मार्गरेट हेक्लर ने HIV के टीके के बारे में एक आशाजनक बात कही, वायरस के सह-खोजकर्ता रॉबर्ट गैलो के साथ उनकी बातचीत के आधार पर: उन्होंने एक पत्रकार सम्मेलन में कहा कि "हमें उम्मीद है कि लगभग 2 वर्षों में हमारे पास परीक्षण के लिए टीके तैयार हो जाएंगे।"[3] निश्चित रूप से, यह पूर्वानुमान अति आशाजनक था, जहां अधिकांश टीकों के निर्माण 10-20 वर्ष लग जाते हैं। लेकिन 30 वर्ष बाद, क्यों कोई लाइसेंस प्राप्त HIV का टीका उपलब्ध नहीं है?

संक्षिप्त में, इसके कारण निम्नलिखित हैं

·       HIV के प्रति प्राकृतिक प्रतिरक्षा क्षमता की कमी

·       HIV के प्रकारों की विविधता

·       सुरक्षात्मक प्रतिरक्षा क्षमता के सह-संबंधों की कमी

·       किसी ऐसे जंतु मॉडल का अभाव जो भरोसेमंद तरीके से मनुष्यों में टीके की प्रभावकारिता के बारे में दर्श सके

इन सभी कारकों से आगे के विकास के लिए टीका के उम्मीदवारों का चयन करना और प्राथमिकता देना कठिन हो जाता है। इनकी व्याख्या नीचे की गई है।

HIV, मानक टीका उपागमों को सबसे पहले और प्रधान रूप से चुनौती देता है, खसरा और चेचक के रोगों के विपरीत, कोई भी HIV के संक्रमण से प्राकृतिक रूप से ठीक होता है। यदि कोई व्यक्ति खसरा से पीड़ित होता है और ठीक हो जाता है, तो संक्रमण के प्रति प्रतिरक्षा अनुक्रिया इतना पर्याप्त होगा कि यह भविष्य में खसरे के संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करेगा। शोधकर्ता सुरक्षा के उस स्तर के लिए एक मॉडल के रूप में इस प्राकृतिक रूप से व्युत्पन्न प्रतिरक्षा क्षमता का प्रयोग करते हैं जो एक सफल टीका को प्रदान करना चाहिए।

प्राकृतिक प्रतिरक्षा क्षमता के लिए किसी मॉडल के बिना, शोधकर्ता के पास उस प्रतिरक्षा क्षमता की पहचान के लिए तरीका नहीं होता जो HIV के खिलाफ प्रभावी होगा, और इसलिए HIV टीका का निर्माण करना बहुत कठिन हो जाता है। (कुछ लोग प्राकृतिक रूप से संक्रमण को नियंत्रित करने में और इसे AIDS की ओर बढ़ने से रोकने में सक्षम होते हैं। इस बात पर शोध कि कैसे ये लोग, जिन्हें “एलीट कंट्रोलर” कहा जाता है, संक्रमण के नियंत्रण में सक्षम होते हैं, टीका के निर्माण की दिशा में दूसरा संभावित मार्ग प्रदान करता है।)

टीका के निर्माण में दूसरी चुनौती यह है कि HIV बार-बार उत्परिवर्तित होता है। वायरस के इस बार-बार परिवर्तन से टीका के लिए टार्गेट का निर्धारण करना कठिन हो जाता है। इसके अलावा, HIV के अनेक उप-प्रकार हैं, जिनमें से प्रत्येक जेनेटिक रूप से भिन्न है; इस बात की संभावना है कि अतिरिक्त उप-प्रकार लगातार निकलते रहेंगे। यह एक दूसरी चुनौती है, चूंकि एक टीका जो एक उप-प्रकार के प्रति सुरक्षा प्रदान करता है, हो सकता है कि वह दूसरे उप-प्रकार के प्रति सुरक्षा प्रदान न करे।

तीसरी चुनौती (पहली के संबंध में) यह है कि शोधकर्ता यह नहीं तय कर पाए हैं कि HIV संक्रमण के लिए सुरक्षात्मक प्रतिरक्षा क्षमता के सह-संबंध क्या होता है। सुरक्षात्मक प्रतिरक्षा क्षमता के सहसंबंध की परिभाषा इस प्रकार है "एक विशिष्ट प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया जो संक्रमण, बीमारी, या अन्य परिभाषित अंत बिंदु के प्रति संरक्षण से निकट रूप से संबंधित होती है।" चूंकि किसी व्यक्ति को यह नहीं ज्ञात होता है कि वह HIV से संक्रमित हो चुका है और फिर प्राकृतिक रूप से वायरस* को साफ कर लेता है, इसलिए हमें यह पता नहीं होता कि किसी व्यक्ति में HIV से सुरक्षा कैसे अभिलक्षित होगी। क्या यह एंटीबॉडीज के किसी निश्चित प्रकार या संख्या का उत्पादन होगा? क्या यह किसी निश्चित प्रकार के मेमरी T कोशिका की निरंतरता होगी? शोधकर्ताओं द्वारा इस बात के निर्धारण तक कि HIV संक्रमण के प्रति सुरक्षात्मक प्रतिरक्षा क्षमता के सहसंबंध क्या हैं, टीका का निर्माण करना और इसका वैधीकरण कठिन होगा।

अंत में, अधिकांश शोधों और टीका के अनुसंधान में संक्रमण और प्रतिरक्षी तंत्र की अनुक्रिया की मूलभूत क्रियाविधि को समझने में जन्तु मॉडल एक महत्वपूर्ण साधन होता है। हालांकि, HIV संक्रमण और प्रतिरक्षी तंत्र की अनुक्रिया के लिए कोई भरोसेमंद, गैर-मानवीय जन्तु मॉडल नहीं है। जंतुओं पर HIV के टीके के परीक्षण से अब तक इस बात का कोई सही अनुमान नहीं मिल सका है कि टीका मनुष्यों में कैसे काम करेगा। शोधकर्ता सिमियन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (SIV), HIV से संबंधित मंकी वायरस, और SIV और HIV के जेनेटिक रूप से अभियंत्रित शंकरों के खिलाफ टीकों का ट्रायल परीक्षण इस उम्मीद में लगातार कर रहे हैं कि HIV के खिलाफ भी समान उपायों का इस्तेमाल किया जा सके।

आशावाद के लिए हाल का कारण 

2009 में, इतिहास के सबसे बड़े टीका परीक्षण के परिणामों की घोषणा की गई। इसे “RV144” या “द थाई ट्रायल” (चूंकि इसे थाइलैंड में किया गया) के रूप में जाना गया, इसमें 16,000 प्रतिभागी शामिल थे और इसे पूरा होने में छ: वर्ष लगे।

परीक्षण में दो प्रायोगिक HIV टीकों के साथ एक “प्राइम बूस्ट” रणनीति अपनाई गई। पहला था कैनरीपॉक्स वायरस का इस्तेमाल करते हुए रीकम्बिएंट टीका, जिसमें जींस डाला गया था जो HIV के एंटीजेनिक प्रोटींस के लिए कोड था।[4][5] इस टीका का इस्तेमाल “प्राइम” के रूप में किया गया था और इसका लक्ष्य था कोशिका-मध्यस्थ प्रतिरक्षा क्षमता (T कोशिका अनुक्रियाएं) को उत्प्रेरित करना। “बूस्ट” टीका HIV के जेनेटिक रूप से अभियंत्रित एंटीजेनिक सतह प्रोटीन से निर्मित था, और यह एंटीबॉडी के उत्पादन (अर्थात B कोशिका अनुक्रियाएं) को उत्प्रेरित करने पर केंद्रित था।[6][7]

प्राइम टीके का परीक्षण कभी भी मनुष्यों में HIV के खिलाफ प्रभाविता के लिए नहीं किया गया था (हालांकि अनेकों सुरक्षा परीक्षणों में इसका इस्तेमाल होता रहा था)। परीक्षण करने पर बूस्ट टीका HIV के खिलाफ प्रभाविता दर्शाने में पहले विफल हुआ था। लेकिन जब RV144 परीक्षणों में कॉम्बिनेशन के इस्तेमाल किया गया तो, टीके HIV संक्रमण की रोकथाम करने में मध्यम रूप से प्रभावी थे। विशेष रूप से, परीक्षण प्रतिभागियों में 31% कम HIV संक्रमण थे जिन्हें प्राइम बूस्ट कॉम्बिनेशन दिया गया जबकि बाकियों को प्लेसिबो (छद्म औषधि) दिया गया था।

31% प्रभावकारिता का स्तर इतना पर्याप्त नहीं होता जिससे कि परीक्षण व्यवस्था से बाहर टीके के इस्तेमाल का आश्वासन मिल सके, खासकर HIV जैसी गंभीर बीमारी के लिए। फिर भी पहली बार था जब HIV टीका प्रभाविता परीक्षण से वाकई वायरस के खिलाफ सुरक्षा दिखाई पड़ा, जिससे शोधकर्ताओं को इस बात की उम्मीद जगी कि एक प्रभावी HIV टीका संभव है।

HIV टीका विकास की वर्तमान स्थिति

RV144 परीक्षण से प्राप्त सकारात्मक परिणामों के आलोक में शोधकर्ताओं के लिए पहली प्राथमिकता है प्राइम-बूस्ट टीका कॉम्बिनेशन से सुरक्षा के सहसंबंध का निर्धारण करना : अर्थात, उन्हें यह सटीक रूप से निर्धारित करना होगा कि प्राइम-बूस्ट कॉम्बिनेशन ने कैसे HIV के संक्रमण के खिलाफ सुरक्षा प्रदान किया। शोधकर्ताओं ने प्राइम-बूस्ट कॉम्बिनेशन (जिसमें अनेक प्रकार की एंटीबॉडी अनुक्रियाएं शमिल हैं) द्वारा उत्पन्न एंटीबॉडीज का अध्ययन किया; T-कोशिका की अनुक्रियाएं हुई या नहीं; और अध्ययन के प्रतिभागियों के व्यक्तिगत जेनेटिक्स ने टीका के कॉम्बिनेशन के प्रति अपनी अनुक्रियाओं भूमिका निभाई या नहीं। 2012 में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि संक्रमण के खिलाफ संरक्षण में T-कोशिका की अनुक्रियाओं की भूमिका संभवत: नहीं थी, और टीके की प्रभाविता वायरल एनवेलप प्रोटींस के कुछ निश्चित हिस्सों के लिए एंटीबॉडी की अनुक्रियाओं से संबंधित थी।[8]

RV144 के परीक्षण में उत्पन्न प्रतिरक्षी अनुक्रिया को समझने और उसे उन्नत करने की कोशिश के लिए अतिरिक्त अध्ययन लगातार जारी है। P5 पार्टनरशिप (पॉक्स-प्रोटीन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) में RV144 के भविष्य के अनुवर्ती प्रभाविता अध्ययनों की योजना बनाई गई है।

शोधकर्ता RV144 की क्रियाविधि और प्रदायन उपागमों की भी अध्ययन कर रहे हैं, इन उम्मीदों में कि HIV टीका के इतिहस के सबसे बड़े परीक्षण से प्राप्त जानकारी का इस्तेमाल करके भविष्य के परीक्षणों के स्वरूप को सुधार सकें। परीक्षण गैर-लाभकारी समूहों, निजी कंपनियों, और थाई एवं अमेरिकी कंपनियों के बीच एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय सहयोग था: दो टीकों का विकास मूल रूप से वैक्सजेन और सैनोफी पैश्चर द्वारा किया गया था; परीक्षण के लिए धनराशि अमेरिका द्वारा प्रदान की गई थी। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ऐलर्जी एंड इंफेक्शस डिजिजेस और यू.एस. आर्मी मेडिकल रिसर्च एंड मटीरियल कमांड; और अध्ययन का क्रियान्वयन थाई मिनिस्ट्री ऑफ पब्लिक हेल्थ के नेतृत्व में अनेकों सहयोगी संगठनों के प्रयासों से किया गया था। टीका विकसित करने वाले यह सोचते हैं कि RV144 परीक्षणों के परिणामों के निरीक्षण द्वारा बहुत कुछ पता किया जा सकता है, लेकिन उत्पन्न चुनौतियां हैं इसके छ: साल और प्रतिभागी संगठनों ने किस प्रकार उन चुनौतियों का सामना किया।

RV144 से पूरी तरह से अलग प्रयास एवं उपागम जारी हैं। शोधकर्ता पहले उल्लेख किए गए “एलीट कंट्रोलर” का अध्ययन कर रहे हैं, जिनके HIV संक्रमण AIDS की ओर नहीं बढ़े, इस उम्मीद में कि उनमें HIV नियंत्रण के लिए जो भी अंतर्जात क्षमता है उससे टीका के विकास में जानकारी मिल सकती है। उन व्यक्तियों के अध्ययन के प्रयास भी किए जा रहे हैं जो बार-बार संपर्क में रहने के बावजूद कभी HIV संक्रमण से प्रभावित नहीं हुए।

बहुत से अन्य टीका उम्मीदवार परीक्षण और विकास के विभिन्न चरणों में हैं। RV144 परीक्षण में “प्राइम” के रूप में प्रयुक्त कैनरीपॉक्स-आधारित रीकम्बिएंट टीका के अलावा, रीकम्बिएंट उम्मीदवार भी एडिनोवायरस के आधार पर विकसित हुए हैं। इस टीका उपागम (HVTN 505) के हाल के परीक्षण को जुलाई 2013 में रोक दिया गया था क्योंकि टीका प्राप्तकर्ताओं में संक्रमण के लिए खतरे को कम नहीं कर सका।[9] अन्य जेनेटिक रूप से अभियंत्रित उम्मीदवार जिसमें एडजवंट - एक एजेंट को प्रतिरक्षी तंत्र को भविष्य में उत्प्रेरित करने में शामिल है, के साथ एडमिनिस्टर्ड प्रोटीन हैं।

इसके अतिरिक्त, रीसस मैकेक बंदरों में SIV परीक्षण के सकारात्मक परिणामों से भविष्य के HIV टीका उम्मीदवारों में एक वेक्टर के रूप में साइटोमेगैलोवायरस (CMV) के इस्तेमाल का विचार उत्पन्न हुआ। इस विधि में, T कोशिकाएं जिन्हें किलर T कोशिका कहा जाता है, जो संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट कर सकती हैं, टीका द्वारा उत्पन्न सुरक्षा प्रदान करती हैं।**[10]

अन्य टीका विधियां प्रगति पर हैं, जैसे वे उम्मीदवार जो आंत - शुरुआती HIV के प्रतिरूपण के लिए समान स्थल- म्युकोसल सतहों में प्रतिरक्षी अनुक्रियाओं को उत्प्रेरित करते हैं।

अन्य में, शोधकर्ता HIV के प्रति एंटीबॉडीज के निर्माण की विधियों की खोज कर रहे हैं।  एंटीबॉडीज वायरस को किसी व्यक्ति को संक्रमित करने से पहले निष्क्रिय कर देते हैं।  पिछले दो वर्षों के सहयोगात्मक कार्य के परिणाम दर्शाते हैं कि कुछ मानव निर्मित एंटीबॉडीज बड़ी संख्या में HIV स्ट्रैंस को निष्क्रिय करने में सक्षम हैं।  ये एंटीबॉडीज HIV की सतह पर कमजोरियों को उजागर करने द्वारा टीके की खोज के लिए एक बेहतरीन लक्ष्य प्रदान करते हैं। 

उपचारात्मक (थेराप्युटिक) टीके

ऊपर वर्णित HIV के टीके बचावकारी टीके हैं। अर्थात, उनका निर्माण HIV से शरीर को संक्रमित होने से रोकथाम करने के लिए किया जाता है। उपचारात्मक टीका एक अलग प्रकार का टीका स्वरूप है, इसका इस्तेमाल संक्रमित हो जाने के बाद किया जाएगा। अधिकांश शोधकर्ता सोचते हैं कि उपचारात्मक HIV टीका एक प्रकार का इलाज नहीं होगा - अर्थात शायद यह शरीर को वायरस से मुक्ति नहीं दिलाएगा और एंटी-रेट्रोवायरल थेरैपी को रोक देगा। हालांकि, इस प्रकार का टीका वायरस के प्रति शरीर की प्रतिरक्षा अनुक्रिया को बूस्ट कर सकता है, जिससे शरीर में मौजूद वायरस की संख्या कम हो सकती है, गंभीर बीमारी का खतरा कम हो सकता है, और संभव रूप से एंटीरेट्रोवायरल दवाओं की आवश्यक खुराक घट सकती है। इस तरह के अनेक उपचारात्मक टीकों का क्लिनिकल परीक्षण किया जा रहा है।[11][12] जुलाई 2014 में, टीका उम्मीदवार के संयोजन में ड्रग रोमिडेप्सिन के 2014 के छोटे से अध्ययन के पहले चरण के परिणमों की घोषणा मेलबॉर्न में हुए अंतर्राष्ट्रीय AIDS सम्मेलन में की गई थी। HIV-संक्रमित व्यक्तियों को टीका प्रदान किया गया ताकि किसी मेमरी इम्यून अनुक्रिया के लिए आधार तय किया जा सके। इसके बाद रोगियों को दवा दी गई, जो इस उद्देश्य से दी गई थी कि HIV को शरीर के छुपे स्थानों से बाहर निकाला जा सके। परीक्षण के चरण 1 के परिणम सकारात्मक थे: दवा से HIV को शरीर के छुपे स्थानों से “बाहर” निकला और HIV की पता लगाने योग्य मात्राएं बढ़ी। परीक्षण का दूसरा चरण वर्ष 2015 तक पूर्ण होने की संभावना है जो यह दिखाएगा कि टीका HIV संक्रमित कोशिकाओं को निष्क्रिय करने में प्रभावी है या नहीं।[13][14]

आगे की उम्मीद

बहुत से अलग-अलग समूह HIV टीका निर्माण की इन विधियों और दूसरी विधियों पर एकजुट हो रहे हैं - इन समूहों की संख्या शायद अब तक के टीका निर्माण में शामिल समूहों की संख्या से बहुत अधिक है। गैर-लाभकारी संगठन, सरकारें, फार्माश्युटिकल कंपनियां, परोपकारी समूह, और हिमायती संगठन साथ मिलकर काम कर रहे हैं जिससे यह प्रयास HIV टीका की दिशा में वास्तव में एक वैश्विक प्रयास बन गया है।

CMV-आधारित वेक्टर टीके की तुलना में अधिक लंबे समय तक प्रतिरक्षा क्षमता का निर्माण करने वाला दूसरा एकमात्र SIV टीका था जिसमें लाइव दुर्बलीकृत सिमिअन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस मौजूद है। इस अभिगम की संभावना मनुष्यों के लिए नहीं मानी जाती है, क्योंकि लाइव HIV टीका, दुर्बलीकृत होने के बावजूद, मानव परीक्षण के लिए बहुत अधिक खतरनाक होगा।

मौजूदा परीक्षण

इंटरनेशनल AIDS वैक्सिन इनीशिएटिव ने वर्तमान और पूर्व के AIDS टीके के परीक्षणों की सूची बनाई है, जिसे स्टेटस, परीक्षण अवधि और रणनीति में वर्गीकृत किया गया है। यहां दिया गया डेटाबेस देखें: 

IAVI ट्रायल्स डेटाबेस

अतिरिक्त पठन 

आप निम्नलिखित संगठनों के जरिए HIV टीका के शोधों के बारे में नई जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं:

·       इंटरनेशनल AIDS वैक्सिन इनीशिएटिव (iavi.org)

·       यू.एस. मिलिटरी HIV वैक्सिन रिसर्च प्रोग्राम (USMHRP)

·       HIV वैक्सिन ट्रायल्स नेटवर्क (HVTN)


  1. HIV/AIDS Fact Sheet. विश्व स्वास्थ्य संगठन ।  20/3/2017 को प्रयुक्त। 

2.     The different stages of HIV infection. AVERT. 20/3/2017 को प्रयुक्त।

3.     Callahan GN. Infection: The uninvited universe. New York: Macmillan, 2006. Cohen J. Shots in the dark: The wayward search for an AIDS vaccine. New York: Macmillan, 2001. 20/3/2017 को प्रयुक्त।

4.     Safety of and immune response to an HIV-1 vaccine in Infants born to HIV infected mothers.  20/3/2017 को प्रयुक्त।

5.     HIV vaccine trial in in Thai adults. 20/3/2017 को प्रयुक्त।

6.     Department of Diseases Control, Ministry of Public Health, and Thai AIDS Vaccine Evaluation Group. The prime-boost phase III HIV vaccine trial.

7.     “Frequently asked questions regarding the RV144 Phase III HIV Vaccine Trial.” Distributed by U.S. Military HIV Research Program (MHRP). Formerly available at hivresearch.org.

8.     Haynes BF, et al. Immune-correlates analysis of an HIV-1 vaccine efficacy trial. NEJM. 2012;366(14)1275:1286.

9.     National Institute of Allergy and Infectious Diseases. Questions and answers: The HVTN 505 HIV Vaccine Regimen Study. 20/3/2017 को प्रयुक्त।

10.  Hansen SG, Ford JC, Lewis MS et al. Profound early control of highly pathogenic SIV by an effector memory T-cell vaccine. Nature. 473:523-527.  14 जून 2016 को प्रयुक्त।

11.  U.S.H.H.S. Therapeutic HIV vaccines. 2006. (54 KB). 20/3/2017 को प्रयुक्त।

12.  Pollard RB, et al. Safety and efficacy of the peptide-based therapeutic vaccine for HIV-1, Vacc-4x: a phase 2 randomised, double-blind, placebo-controlled trialLancet Inf Dis.2014;14(4)291:200.  20/3/2017 को प्रयुक्त।

13.  The safety and efficacy of the histone deacetylase inhibitor romidepsin and the therapeutic vaccine Vacc-4x for the reduction of the latent HIV-1 reservoir (REDUC). ClinicalTrials.gov Identifier NCT02092116. 20/3/2017 को प्रयुक्त।

14.  First evidence that romidepsin "kicks" HIV out of reservoirs. Bionor Pharma. 20/3/2017 को प्रयुक्त।

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अंतिम अपडेट 20 मार्च 2017