मेनिंगोकोकल रोग

निसेरिया मेनिंजाइटिडिस जीवाणु, जिसे मेनिंगोकोकस [मेनिंगोकोक्सी (बहुवचन)], भी कहा जाता है, जीवाणु जनित मेनिंजाइटिस और सेप्सिस (रक्तप्रवाह का संक्रमण) का एक महत्वपूर्ण कारण है। समग्र रूप से, एन. मेनिंजाइटिडिस के कारण होने वाली विभिन्न रुग्णताओं को मेनिंगोकोकल रोग कहा जाता है।

लक्षण

मेनिंगोकोकल मेनिंजाइटिस के लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, व्याकुलता और गरदन की अकड़न शामिल हैं और साथ में मिचली, उल्टी भी आ सकती है और रोशनी के प्रति संवेदनशीलता हो सकती है। मेनिंगोकोकल बैक्टीरिमिया (या मेनिंगोकोक्सेमिया - रक्तप्रवाह संक्रमण) के लक्षणों में तेजी से बुखार चढ़ता है और चकत्ते निकलते हैं। मेनिंगोकोकल रोग के दूसरे रूप के लक्षण अंगों की खराबी से संबंधित हैं : ओटिटिस मीडिया में काम का दर्द होता है; अर्थराइटिस में जोड़ का दर्द और सूजन होता है।

तेजी से फैलने वाला मेनिंगोकोकल रोग जानलेवा हो सकता है; इससे बचने वाले लोगों में स्थायी जख्म हो सकता है, जिसमें मस्तिक की क्षति, श्रवण क्षति, या अंगों का नुकसान हो सकता है। मेनिंगोकोक्सी के कारण न्यूमोनिया, ओटिटिस मीडिया (कान का संक्रमण), अर्थराइटिस, और अन्य संक्रमण हो सकते हैं हालांकि ये कम प्रचलित हैं।

प्रसार

लगभग 10-20% किशोर और वयस्क बिना बीमार हुए एन. मेनिंजाइटिडिस  से पीड़ित होते हैं। इन व्यक्तियों में हफ्तों या महीनों तक जीवाणु रह सकते हैं। जीवाणु सीधे शारीरिक संपर्क के जरिए या खांसने या छींकने के परिणामस्वरूप श्वसन के स्रावों द्वारा फैल सकता है।

असामान्य प्लीहा (स्प्लीन) कार्यशीलता से पीड़ित व्यक्तियों में मेनिंगोकोकल रोग होने का खतरा उच्च होता है। HIV संक्रमण और कुछ जेनेटिक कारक भी मेनिंगोकोकल रोग होने की संभावना को बढ़ाते हैं, जैसा कि सिगरेट पीना। किसी संक्रमित व्यक्ति के परिवार के सदस्यों के लिए भी खतरा बढ़ जाता है।

अर्जित मेनिंगोकोकल संक्रमणों का खतरा विकासशील देशों में काफी उच्च है। एपिडेमिक मेनिंगोकोकल रोग के लिए सबसे खतरनाक क्षेत्र है सब-सहारन अफ्रीका।

उपचार और देखभाल

मेनिंगोकोकल रोग के उपचार के लिए एंटीबायोटिक्स का प्रयोग किया जाता है। मेनिंगोकोकल मेनिंजाइटिस के लक्षण अन्य जीवाणुओं द्वारा हुए मेनिजाइटिस के स्वरूपों की तरह होते हैं, उपचार के लिए दिए जाने वाले एंटीबायोटिक्स का व्यापक दायरा हो सकता है यदि इस बात की पुष्टि हो जाए कि एन. मेनिंजाइटिडिस संक्रमण के कारण हुआ है। इसकी पुष्टि होने के बाद, उपचार की प्रक्रिया पूरी करने के लिए पेनिसिलिन या अन्य उपयुक्त सिंगल एजेंट दिया जा सकता है।

जटिलताएं और मृत्यु दर

तेजी से फैलने वाला मेनिंगोकोकल रोग अत्यंग गंभीर हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मेनिंगोकोकल मेनिंजाइटिस को, मेनिंगोकोकल रोग का सबसे सामान्य निरूपण है, “हमेशा मेडिकल आपातस्थिति के रूप में देखा जाना चाहिए” और इसके लिए अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत होती है।

तेजी से फैलने वाला मेनिंगोकोकल रोग जानलेवा हो सकता है: एंटीबायोटिक उपचार के बाद भी मृत्यु दर 9-12% के बीच होती है। मेनिंगोकोकल रोग से बचने वाले लगभग 20% लोगों में स्थायी जख्म हो सकता है, जिसमें मस्तिक की क्षति, श्रवण क्षति, या अंगों का नुकसान हो सकता है।

उपलब्ध टीके

पांच सेरोग्रुप्स - जीवाणु के समूह जिनमें एक कॉमन एंटीजन होता है जो प्रतिरक्षी क्षमता के निर्माण में सक्षम होता है - समग्रे रूप से लगभग सभी आक्रामक मेनिंगोकोकल रोग के लिए जिम्मेदार होते हैं। ये हैं मेनिंगोकोक्सि ग्रुप A, B, C, Y, और W-135.

मेनिंगोकोकल पॉलिसैकराइड के टीके कई दशकों से कुछ देशों में उपलब्ध रहे हैं। हालांकि, न्युमोकोकल रोग के खिलाफ बने पॉलीसेकराइड के टीके के समान ही वे वयस्कों में काफी प्रभावी होते हैं और लगातार रूप से छोटे बच्चों प्रतिरक्षी क्षमता का निर्माण नहीं करता। पॉलीसेकराइड-प्रोटीन कॉन्जुगेट मेनिंगोकोकल के टीके छोटे बच्चों में बहुत अधिक प्रभावकारी होते हैं।

निम्नलिखित मेनिंगोकोकल के टीकों का निर्माण किया जा चुका है। उनका इस्तेमाल रोग की दरों और व्यक्तिगत राष्ट्रीय प्रतिरक्षण अनुसूची और अभियानों पर निर्भर करता है।

  • कुछ देशों में रोग की रोकथाम के लिए पॉलिसैकराइड के टीके बायवैलेंट (A और C), ट्रायवैलेंट (समूह A, C, और W), और टेट्रावैलेंट (समूह A, C, Y, और W-135) के रूप में उपलब्ध हैं।
  • पॉलिसैकराइड-प्रोटीन कॉन्जुगेट के टीके टेट्रावैलेंट (समूह A, C, Y, और W-135) और मोनोवैलेंट (A या C) हो सकते हैं।
  • समूह B के लिए, ऐसे टीकों का निर्माण किया गया है जिनमें सेरोग्रुप B मेनिंगोकोकल जीवाणु के विशिष्ट अवयवों का इस्तेमाल किया गया है। इन्हें प्राय: रीकम्बिएंट टीका कहा जाता है, जो उनके निर्माण के लिए प्रयुक्त तनकीकी पर आधारित होता है।

टीकाकरण की अनुशंसाएं

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रोग के बोझ, जोखिम समूहों और उपलब्ध संसाधनों पर मेनिंगोकोकल टीकाकरण के लिए देशों के आधार पर अनुशंसा की है।

हालांकि मेनिंगोकोकल के टीकों का प्रयोग विकासशील देशों में व्यापक रूप से नहीं किया जाता है, एक समूह A कॉन्जुगेट मेनिंगोकोकल टीका का निर्माण विशेष रूप से सब-सहारन अफ्रीकन देशों में प्रयोग करने के लिए किया गया था जहां महामारी की दरें उच्च थी। टीके का पहला इस्तेमाल 2010 में किया गया था और तब से इन देशों में रोग की दरों में आश्चर्यजनक कमी आई।


स्रोत

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अंतिम अपडेट 18 अप्रैल 2017