पोलियो

पोलियोमायलाइटिस, या पोलियो के तीन प्रकारों में से किसी के द्वारा हो सकता है, जो एंटेरोवाइरस जीनस के सदस्य होते हैं

पोलियो एक ऐसा रोग है जिसने कभी एक वर्ष में दसियों हजारों बच्चों को पंगु बना दिया। अब यह वैश्विक रोग उन्मूलन प्रयास का लक्ष्य है। वर्ष 1988 में पोलियो के सर्वाधिक मामले सामने आए, जब लगभग 350,000 लोग संक्रमित हुए थे। वर्ष 2015 में दुनिया भर से पोलियो के केवल 74 मामले सामने आए थे। केवल दो देश पाकिस्तान और अफगानिस्तान में अभी भी पोलियो का व्यक्ति से व्यक्ति प्रसार जारी है।

लक्षण

लगभग 95% पोलियो के मामलों में व्यक्ति में कोई लक्षण नहीं दिखाई देता। ये असिम्प्टोमैटिक (स्पर्शोन्मुखी) मामले कहलाते हैं। बाकी के पोलियो के मामलों को तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है : अबॉर्टिव पोलियो, नन-पैरालिटिक पोलियो और पैरालिटिक पोलियो।

अबॉर्टिव पोलियोइन मामलों में, पोलियो एक हल्की रुग्णता होती है, जिसमें बुखार, थकावट, सिरदर्द, गले का खराश, मिचली और दस्त जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

नन-पैरालिटिक पोलियो: इन मामलों में विशेष रूप से अबॉर्टिव पोलियो के लक्षण शामिल होते हैं, और साथ ही अतिरिक्त न्यूरोलॉजिकल लक्षण होते है जैसे रोशनी के प्रति संवेदनशीलता और गरदन की अकड़न।

पैरालिटिक पोलियोपैरालिटिक पोलियो का पहला लक्षण, वायरल जैसे लक्षणों के शुरुआती अवधि के बाद, आमतौर पर प्रत्यावर्त (रीफ्लेक्स) क्षमता में कमी और मांसपेशी में दर्द या स्पैज्म के रूप में दिखाई देता है। इसके बाद, प्राय: असंयमित, पक्षाघात होता है। पोलियो से ग्रसित 1%-2% से कम लोगों को पक्षाघात होता है। पैरालिटिक पोलियो के अधिकतर मामलों में, रोगी पूरी तरह से स्वस्थ हो जाता है। हालांकि, कुछ लोगों के लिए, पक्षाघात या मांसपेशी की दुर्बलता जीवन भर बनी रहती है।

प्रसार

पोलियो एक बहुत ही संक्रामक बीमारी है जो लोगों के बीच संपर्क से, नाक और मुंह के स्रावों द्वारा और संदूषित विष्ठा के संपर्क में आने फैलता है। पोलियो वायरस शरीर में मुंह के जरिए प्रवेश करता है, पाचन नली में द्विगुणित होता है, जहां यह आगे भी द्विगुणित होता रहता है।  

उपचार और देखभाल

पोलियो की कोई देखभाल नहीं होती, इसलिए इसकी रोकथाम करना इससे लड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम है। कुछ निश्चित दवाइयों और उपचार पद्धतियों से रोगी को सहयोगात्मक देखभाल प्रदान की जा सकती है ताकि मांशपेशी पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सके। जिन रोगियों के श्वसन में शामिल मांसपेशियों का पक्षाघात लगातार बना रहता है तो ऐसे रोगी को कृत्रिम श्वसन सहायता दी जाती है, जिसे हटाया जा सकता है यदि रोगी प्रभावित मांसपेशियों का इस्तेमाल दुबारा करने में सक्षम हो जाता है।

जटिलताएं

पैरालिटिक पोलियो के गंभीर मामलों में, गला और छाती का पक्षाघात हो सकता है। यदि रोगी को कृत्रिम श्वसन सहायता नहीं जाए तो रोगी की मृत्यु हो सकती है। पैरालिटिक पोलियो से ग्रसित 2%-5% बच्चों की मृत्यु हो जाती है, जबकि वयस्कों में 15%-30% के मृत्यु होती है।

पोलियो से होने वाला पक्षाघात अस्थायी या स्थायी हो सकता है। यहां तक कि उन लोगों के लिए जिन्हें अस्थायी पक्षाघात होता है, उबरने वाले लोगों के पाद टेढ़े-मेढ़े हो सकते हैं जीवन पर्यंत विकलांगता हो सकती है।

उपलब्ध टीके

पोलियो का कोई इलाज नहीं होता, लेकिन पोलियो का टीका बार-बार देने से बच्चों को जीवन भर सुरक्षा मिलती है। व्यापक टीकाकरण के कारण, पश्चिमी गोलार्ध से पोलियो का उन्मूलन 1994 में हो गया था। आज, यह केवल दो देशों (अफगानिस्तान और पाकिस्तान में 2016 तक) में इसका प्रसार जारी है, इसके साथ ही पड़ोस से देशों में कभी-कभी फैल जाता है। टीकाकरण कार्यक्रम लगातार चलाए जा रहे हैं ताकि इन अंतिम बीमारियों का सफाया किया जा सके।

आयातित मामलों के जोखिम के कारण अभी भी दुनिया भर में पोलियो टीकाकरण की अनुशंसा की जाती है।

पोलियो के दो प्रकार के टीके उपलब्ध हैं। एक इंजैक्टेड, निष्क्रिय टीका (IPV) है। इसका प्रयोग प्राय: दुनिया के उन भागों में किया जाता है जो बहुत सालों से पोलियो मुक्त हैं। मौखिक दुर्बलीकृत (कमजोर) पोलियो टीका (OPV) का प्रयोग उन क्षेत्रों में किया जाता है जहां पोलियो संक्रमण का खतरा अभी भी बना हुआ है।

टीका के बारे में भ्रांति

पोलियो टीका के कारण लड़कियों का लड़कों में बांझपन या निष्फलता नहीं होती। यह बहुत सुरक्षित है और बच्चों को जीवन भर पक्षाघात से सुरक्षित रखता है।

टीकाकरण की अनुशंसाएं

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस बात की अनुशंसा की है कि सभी बच्चों को पोलियो टीका की 3 खुराकें दी जानी चाहिए, पहला खुराक 2 महीने की आयु में। हालांकि, उन स्थानों पर जहां पोलियो के प्रकोप का जोखिम अधिक है, वहां पोलियो टीका की 3 खुराकों की प्राथमिक सीरीज से पहले जन्म के समय पोलियो टीका की एक खुराक की सलाह जी जाती है। उन स्थानों पर जहां OPV का प्रयोग किया जाता है, वहां विश्व स्वास्थ्य संगठन बच्चों में एक अतिरिक्त, IPV के सिंगल खुराक की सलाह देता है।

 


स्रोत

सेंटर्स फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन। Poliomyelitis. In Epidemiology and Prevention of Vaccine-Preventable Diseases (512 KB). Atkinson W, Wolfe S, Hamborsky J, McIntyre L, eds. 13th ed. Washington DC: Public Health Foundation, 2015. 31/3/2017 को प्रयुक्त।

विश्व स्वास्थ्य संगठन । Poliomyelitis. 31/3/2017 को प्रयुक्त।

विश्व स्वास्थ्य संगठन । Poliomyelitis. 31/3/2017 को प्रयुक्त।

विश्व स्वास्थ्य संगठन । Polio vaccines: WHO position paper (611 KB). March 2016. 14 जून 2016 को प्रयुक्त।

PDFs पढ़ने के लिए, Adobe Reader डाउनलोड करें और इंस्टॉल करें।

अंतिम अपडेट 31 मार्च 2017