टीकों के बारे में शीर्ष बीस प्रश्न

  1. टीके कैसे काम करते हैं? क्या वे वायरस और बैक्टीरिया के खिलाफ काम करते हैं?
  2. क्यों सभी टीके 100% कारगर नहीं होते?
  3. इतने सारे टीके क्यों हैं?
  4. क्या प्राकृतिक प्रतिरक्षा क्षमता टीका अर्जित प्रतिरक्षा क्षमता से बेहतर होती?
  5. क्यों कुछ टीकों को बूस्टर्स की आवश्यकता होती है?
  6. क्या आपको उस टीके से रोग हो सकता है जो इसकी रोकथाम के लिए होता है? और क्यों कुछ टीकों में लाइव पैथोजन होते हैं जबकि कुछ टीकों में मृत पैथोजन होते हैं?
  7. क्या शिशुओं का प्रतिरक्षी तंत्र बहुत से टीकों को संभाल सकता है?
  8. समूह प्रतिरक्षा क्या है? क्या यह वास्तविक है? क्या यह काम करता है?
  9. अंडे से एलर्जी का कुछ टीकों से अंतर्विरोध क्यों है?
  10. मैंने कुछ लोगों से सुना है कि टीके दीर्घ-कालिक स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े हैं जैसे मधुमेह, बांझपन, और ऑटिज्म। क्या यह सही है?
  11. मुझे मेरे बच्चे के हाल के प्रतिरक्षण से कुछ जानकारी मिली है कि टीकों के बहुत से संभावित दुष्परिणाम होते हैं। टीकाकरण की अनुशंसा क्यों की जाती है यदि इनसे सारे दुष्परिणाम उत्पन्न हो सकते हैं?
  12. क्य हम टीकों के साथ पर्याप्त सुरक्षा परीक्षण करते हैं?
  13. क्या टीकों में गिराए गए भ्रूण का ऊतक या जिलेटिन होता है?
  14. क्या यह सच है कि बेहतर स्वच्छता और पोषण से मृत्यु और रोग दरों में कमी आती है, न कि टीकों से?
  15. हम अन्य रोगों का उन्मूलन क्यों नहीं कर सकते, जैसा कि हमने स्मॉलपॉक्स का किया?
  16. क्या पोलियो का टीका HIV, कैंसर, मानसिक मंदन, या पुरुषों या महिलाओं के बांझपन से जुड़ा है?
  17. BCG का टीका लेना बच्चों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
  18. मुझे लीवर की खराबी नहीं है और न ही मेरे परिवार के लोगों को हेपाटाइटिस है। क्यों हेपाटाइटिस B का टीका शिशुओं के लिए महत्वपूर्ण है?
  19. टिटनस का टीके से मेरे बच्चे को क्या करना है? वह कहीं भी नहीं गिरा और न ही उसे कोई कट का जख्म है।
  20. टाइफाइड का टीका लेना क्यों महत्वपूर्ण है? और क्यों कुछ डॉक्टर इसे बसंत ऋतु में लेने की सलाह देते हैं?

  1. टीके कैसे काम करते हैं? क्या वे वायरस और बैक्टीरिया के खिलाफ काम करते हैं?

    टीके किसी विशेष बीमारी द्वारा भविष्य में होने वाले “हमले” के खिलाफ आपकी प्रतिरक्षी तंत्र को प्रेरित करते हैं। कुछ टीके हैं जो वायरल और बैक्टीरियल पैथोजन दोनों के खिलाफ होते हैं, या रोग उत्पन्न करने वाले कारकों के खिलाफ।

    जब कोई पैथोजन आपके शरीर में प्रवेश करता है, तब आपका प्रतिरक्षी तंत्र एंटीबॉडीज का निर्माण करता है जो इस पैथोजन से लड़ने की कोशिश करते हैं। आपकी प्रतिरक्षी अनुक्रिया की शक्ति के आधार पर और इस आधार पर कि एंटीबॉडीज कितने प्रभावी तरीके से पथोजन से लड़ता है, आप बीमार हो सकते हैं या नहीं भी हो सकते। हालांकि, यदि आप बीमार होते हैं, तो कुछ एंटीबॉडीज जिनका निर्माण होता है वे आपके शरीर में बने रहेंगे और आपके ठीक होने के बाद वाचडॉग की भूमिका निभाएंगे। यदि आप भविष्य में उसी पैथोजन के संपर्क में आते हैं तो एंटीबॉडीज इसे पहचान लेंगे और इससे मुकाबला करेंगे। प्रतिरक्षी तंत्र के इसी कार्यप्रणाली के कारण टीके काम करते हैं। उनका निर्माण मृत, कमजोर या पैथोजन के आंशिक संस्करण के रूप में किया जाता है। जब आप कोई टीका लेते हैं, इसमें मौजूद पैथोजन का कोई भी संस्करण इतना मजबूत या इतना पर्याप्त नहीं होता कि वह आपको बीमार कर दे, लेकिन यह आपके प्रतिरक्षी तंत्र के लिए इतना पर्याप्त होता है कि वह इस पैथोजन के खिलाफ एंटीबॉडीज का निर्माण कर सकता है। परिणामस्वरूप, आपको भविष्य में बिना बीमार हुए रोग के खिलाफ प्रतिरक्षा हासिल होता है: यदि आप पैथोजन के संपर्क में दुबारा आते हैं, तो आपका प्रतिरक्षी तंत्र इसे पहचान लेगा और इसका मुकाबला करेगा। जीवाणुओं के खिलाफ कुछ टीके खुद जीवाणु के एक रूप में बनाए जाते हैं। दूसरी स्थितियों में, उन्हें जीवाणु द्वारा उत्पन्न विष के एक रूपांतरित स्वरूप में भी बनाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, टिटनस प्रत्यक्ष रूप से क्लोस्ट्रिडियम टेटानी जीवाणु के कारण नहीं होता। बल्कि, इसके लक्षण उस बैक्टीरियम द्वारा उत्पन्न विष टेटानोस्पैस्मिन द्वारा मुख्य रूप से अभिलक्षित होते हैं। इसलिए जीवाणु संबंधी  कुछ टीकों को कमजोर या विष के निष्क्रिय संस्करण से बनाया जाता है जो वास्तव में बीमारी के लक्षण पैदा करता है। यह कमजोर या निष्क्रिय विष टॉक्साइड कहलाता है। उदाहरण के लिए, टिटनस प्रतिरक्षण टेटानोस्पैस्मिन टॉक्साइड से तैयार किया जाता है।

  2. ओपार

  3. क्यों सभी टीके 100% कारगर नहीं होते?

    टीकों को प्रतिरक्षी अनुक्रिया उत्पन्न करने के लिए तैयार किया जाता है जो टीका लिए हुए व्यक्ति को भविष्य में रोग के संपर्क में आने के दौरान प्रतिरक्षा प्रदान करेगा। हालांकि, व्यक्तिगत प्रतिरक्षी तंत्र कुछ मामलों में इतने पर्याप्त रूप से अलग-अलग होते हैं कि व्यक्ति का प्रतिरक्षी तंत्र समुचित अनुक्रिया उत्पन्न नहीं कर पाता। परिणामस्वरूप, वह व्यक्ति या महिला टीकाकरण के बाद प्रभावी रूप से सुरक्षित नहीं हो पाती। माना जाता है कि अधिकांश टीकों की प्रभावकारिता उच्च होती है। MMR टीके (खसरा, गलसुआ और रुबेला) या केवल खसरा टीके की दूसरी खुराक लेने के बाद, 99.7% टीका युक्त व्यक्ति खसरा के प्रति सुरक्षित हो जाते हैं। निष्क्रिय पोलियो का टीका तीन खुराक के बाद 99% प्रभावी होता है। छोटी चेचक (चेचक) का टीका सभी वैरिसेला संक्रमणों से बचाव में 85% और 90% के बीच प्रभावी होता है, लेकिन हल्के और गंभीर चेचक के मामले में 100% कारगर है।

  4. ओपार

  5. इतने सारे टीके क्यों हैं?

    वर्तमान में, डब्लूएचओ बाल्यावस्था टीकाकरण ने जन्म से लेकर छ वर्ष की आयु के सभी बच्चों के लिए 11 विभिन्न रोगों के लिए प्रतिरक्षण शामिल करने की अनुशंसा की है। प्रत्येक बीमारी जिसके लिए टीकाकरण की सलाह दी जाती है उनके कारण गंभीर अस्वस्थ्यता हो सकती है या मृत्यु भी हो सकती है, और यहां तक कि टीकाकरण की निर्धारित दर में कमी आने पर बीमारी दुबारा तेजी से प्रकट हो सकती है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, और कुछ मध्य पूर्वी और अफ्रीकी देशों में, धार्मिक, सांस्कृतिक और राजनैतिक कारकों के कारण टीकाकरण की दरों कमी आई जिससे पोलियो और खसरा का प्रकोप दुबारा शुरू हुआ। इन रोगों ने कुछ लोगों को जीवन भर के लिए शारीरिक रूप से विकलांग बना दिया। अनुसूचित देशों पर प्रत्येक टीके की अनुशंसा की जाती है क्योंकि तीव्र संक्रमण के खतरे हैं।

  6. ओपार

  7. क्या प्राकृतिक प्रतिरक्षा क्षमता टीका अर्जित प्रतिरक्षा क्षमता से बेहतर होती?

    कुछ मामलों में, प्राकृतिक प्रतिरक्षा क्षमता टीकाकरण से प्राप्त प्रतिरक्षा क्षमता से अधिक टिकाऊ होती है। हालांकि, प्राकृतिक संक्रमण का खतरा प्रत्येक अनुशंसित टीका के लिए प्रतिरक्षण के खतरे से अधिक होता है। उदाहारण के लिए, तीव्र खसरा के संक्रमण से प्रत्येक 1,000 संक्रमित व्यक्ति में से एक व्यक्ति को एंसेफेलाइटिस (मस्तिष्क प्रदाह) होता है। कुल मिलाकर, खसरा का संक्रमण प्रत्येक 1,000 संक्रमित व्यक्ति में से दो की जान लेता है। इसके विपरीत, कॉम्बिनेशन MMR (खसरा, गलसुआ और रुबेला) का टीके से गंभीर एलर्जिक रिऐक्शन प्रत्येक दस लाख टीकायुक्त लोगों में होता है, साथ ही खसरा के संक्रमण की रोकथाम करता है। टीका-अर्जित प्रतिरक्षा क्षमता के फायदे, प्राकृतिक संक्रमण के गंभीर खतरों की तुलना में असाधारण रूप से अधिक हैं। इसके अलावा, टिटनस के टीके, और कुछ अन्य टीके, वास्तव में प्राकृतिक संक्रमण की तुलना में अधिक प्रभावकारी प्रतिरक्षा क्षमता प्रदान करते हैं।

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  9. क्यों कुछ टीकों को बूस्टर्स की आवश्यकता होती है?

    यह पूरी तरह से नहीं जाना गया है कि क्यों अर्जित प्रतिरक्षा क्षमता की अवधि अलग-अलग टीकों के लिए अलग-अलग होती है। कुछ टीके केवल एक ही खुराक में जीवन भर प्रतिरक्षा प्रदान करते हैं, जबकि कुछ टीकों को प्रतिरक्षा बनाए रखने के लिए बूस्टर्स की जरूरत होती है। हाल के शोध से पता चलता है कि किसी विशेष रोग के खिलाफ प्रतिरक्षा क्षमता की निरंतरता उस गति पर निर्भर कर सकती है जिसपर रोग शरीर में बढ़ता है। यदि रोग बहुत तेजी के बढ़ता है, तो हो सकता है कि प्रतिरक्षी तंत्र की स्मृति अनुक्रिया (अर्थात, पिछले संक्रमण या टीकाकरण के बाद उत्पन्न “वाचडॉग एंटीबॉडीज”) इतनी तेजी से प्रतिक्रिया न दे पाए जिससे रोग से बचाव हो सके - यदि वे रोग के बारे में हाल में “रिमाइंडेड” न हो और पहले से इसकी निगरानी न कर रहा हो। बूस्टर्स आपके प्रतिरक्षी तंत्र के लिए एक “रिमाइंडर” का काम करते हैं।

    टीकों द्वारा उत्पन्न प्रतिरक्षा क्षमता को निरंतर बनाए रखने के लिए शोध लगातार जारी है।

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  11. क्या आपको उस टीके से रोग हो सकता है जो इसकी रोकथाम के लिए होता है? और क्यों कुछ टीकों में लाइव पैथोजन होते हैं जबकि कुछ टीकों में मृत पैथोजन होते हैं?

    मृत पैथोजन के संस्करण के साथ बने टीकों या पैथोजन के एक अंश के साथ बने टीकों से अस्वस्थ्यता नहीं होती। जब कोई व्यक्ति ये टीके लेते हैं, तो उसके लिए इस बात की बिल्कुल संभावना नहीं होती है कि वे बीमार होंगे। जीवित, दुर्बलीकृत (या कमजोर) टीके सैद्धांतिक रूप से अस्वस्थ्यता पैदा कर सकते हैं: क्योंकि वे अभी भी द्विगुणित (हालांकि भली-भांति नहीं) हो सकते हैं, उत्परिवर्तन संभव है, जिससे पैथोजन का स्वरूप उग्र हो सकता है। हालांकि, टीकों का निर्माण इस बात को ध्यान में रख कर किया जाता है, और इस संभावना को न्यूनतम करने के लिए दुर्बलीकृत किया जाता है।  .यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि दुर्बलीकृत टीकों के कारण उन व्यक्तियों को गंभीर समस्या हो सकती हैं जिनके प्रतिरक्षी तंत्र कमजोर हैं, जैसे कैंसर के रोगी। ऐसे व्यक्तियों को यदि उपलब्ध हो तो टीकों का मृत स्वरूप दिया जा सकता है। यदि उपलब्ध नहीं है, तो उनके चिकित्सक टीकाकरण नहीं करने की सलाह दे सकते हैं। ऐसी स्थितियों में, व्यक्ति सुरक्षा के लिए समूह प्रतिरक्षा क्षमता पर निर्भर करते हैं।

    क्यों कुछ टीकों में जीवित पैथोजन होते हैं और क्यों कुछ टीकों में मृत पैथोजन होते हैं, इसके कारण अस्वस्थ्यता के अनुसार अलग-अलग होते हैं। हालांकि, सामान्य तौर पर बोलते हुए, जीवित, दुर्बलीकृत टीके मृत टीकों की तुलना में दीर्घकालिक प्रतिरक्षा क्षमता का निर्माण करते हैं। इसलिए, मृत टीकों को प्रतिरक्षा क्षमता बनाए रखने के लिए बूस्टर्स की आवश्यक हो सकती है। हालांकि, मृत टीके स्टोरेज के उद्देश्यों से अधिक स्थायी होते हैं, और उनसे कोई अस्वस्थ्यता नहीं होती। चिकित्सा समुदाय को इस दुविधा को समझना चाहिए इस बात का निर्णय करने के लिए कि किसी विशेष रोग के खिलाफ किस विधि का इस्तेमाल होना चाहिए।

  12. ओपार

  13. क्या शिशुओं का प्रतिरक्षी तंत्र बहुत से टीकों को संभाल सकता है?

    हां। अध्ययनों से यह पता चलता है कि नवजातों के प्रतिरक्षी तंत्र एक बार से एक से अधिक टीकों को झेल सकते हैं - वर्तमान में अनुशंसित संख्याओं से अधिक। प्रतिरक्षण शेड्यूल नवजात की प्रतिरक्षा अनुक्रिया उत्पन्न करने की क्षमता पर आधारित होता है, साथ ही जब उन्हें किसी निश्चित अस्वस्थ्यताओं का खतरा होता है। उदाहरण के लिए, जन्म के समय मां से बच्चे में हस्तांतरित प्रतिरक्षा क्षमता अस्थायी होती है, और इसमें विशेष रूप से पोलियो और हेपाटाइटिस B के लिए प्रतिरक्षा शामिल नहीं होती।

  14. ओपार

  15. समूह प्रतिरक्षा क्या है? क्या यह वास्तविक है? क्या यह काम करता है?

    समूह प्रतिरक्षा, जिसे समुदाय प्रतिरक्षा भी कहते हैं, वह सुरक्षा है जो उच्च टीकाकरण दरों द्वारा समुदाय में सभी लोगों को प्रदान किया जाता है। किसी दिए गए रोग के खिलाफ पर्याप्त टीकाकृत लोगों के साथ, समुदाय में रोगों के लिए पैर पसारना कठिन हो जाता है। यह रोग के प्रकोप की संभावना को कम करने द्वारा उन लोगों को भी कुछ सुरक्षा प्रदान करता है जो टीका लेने में सक्षम नहीं होते हैं - जिसमें नवजात और वे व्यक्ति शामिल होते हैं जिन्हें पुरानी रुग्णताएं होती हैं।

  16. ओपार

  17. अंडे से एलर्जी का कुछ टीकों से अंतर्विरोध क्यों है?

    कुछ टीकों, जिसमें इंफ्लुएंजा के खिलाफ बहुत से टीके शामिल हैं, का संवर्धन मुर्गी के अंडे में किया जाता है। टीका निर्माण करने की प्रक्रिया के दौरान, अधिकांश अंडा प्रोटीन हटा दिए जाते हैं, लेकिन इस बात की कुछ चिंता होती है कि ये टीके उन लोगों में एलर्जिक रिऐक्शन पैदा कर सकते हैं जिन्हें अंडे से ऐलर्जी होती है। हाल के रिपोर्ट से पता चला है कि अंडे से एलर्जी वाले बहुत से बच्चों में जिन्हें अंडों के प्रयोग से निर्मित इंफ्लुएंजा का टीका दिया गया था, कोई दुष्परिणाम नहीं उत्पन्न हुआ; अध्ययन समूह के लगभग 5% बच्चों में तुलनात्मक रूप से नगण्य प्रभाव देखने को मिला जैसे पित्तियां, उनमें से अधिकांश बिना किसी इलाज के ठीक हो गए. आगे इस समस्या के अध्ययन के लिए अतिरिक्त शोध जारी है। कुछ मामलों में, केवल उन लोगों को अंडा-आधारित टीके नहीं लेने की सलाह दी जाती है जिन्हें अंडे से गंभीर (जानलेवा) एलर्जी है। आपका डॉक्टर आपको विशेष जानकारी प्रदान कर सकता है।

  18. ओपार

  19. मैंने कुछ लोगों से सुना है कि टीके दीर्घ-कालिक स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े होते हैं जैसे मधुमेह, बांझपन, और ऑटिज्म। क्या यह सही है?

    नहीं, यह सही नहीं है। टीकों से ऑटिज्म होने की संभावना का प्रकाशन उस ब्रिटिश फिज़ीशियन द्वारा 1998 पेपर के बाद किया गया था जिन्होंने दावा किया था कि उनके पास यह प्रमाण है कि MMR (खसरा, गलसुआ और रुबेला) टीका का संबंध ऑटिज्म से था। संभावित संबंध की गहन खोज की गई; ऐसे संबंध पर एक से एक अध्ययन किए गए जिसमें ऐसा कोई लिंक नहीं पाया गया, और मूल 1998 अध्ययन को लैनसेट द्वारा औपचारिक रूप से वापस ले लिया गया, लैनसेट ने ही इसे मूल रूप से प्रकाशित किया था। परिरक्षक थाइमेरोसल, जिसका प्रयोग कुछ टीकों में किया जाता है, और ऑटिज्म के बीच के संभावित लिंक पर बहुत से अध्ययन किए गए; एक बार ऐसा कोई लिंक नहीं पाया गया। इस बात की संभावना है कि यह भ्रांति इसलिए फैली कि शुरुआती बाल्यावस्था टीकाकरण और ऑटिज्म के लक्षण के पहले प्रकटीकरण के बीच का समय एक ही था। इसके अलावा, इस बात का कोई साक्ष्य नहीं पाया गया कि टीकों के कारण दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं जैसे मधुमेह और बांझपन।

     

  20. ओपार

  21. मुझे मेरे बच्चे के हाल के प्रतिरक्षण से कुछ जानकारी मिली है कि टीकों के बहुत से संभावित दुष्परिणाम होते हैं। टीकाकरण की अनुशंसा क्यों की जाती है यदि इनसे सारे दुष्परिणाम उत्पन्न हो सकते हैं?

    प्रत्येक टीके का एक संभावित दुष्परिणाम होता है। विशेष रूप से ये बहुत हल्के होते हैं: इंजैक्शन के स्थान (शॉट के जरिए दिए जाने वाले टीके के लिए) पर जख्म, सिरदर्द, और हल्का बुखार टीका के दुष्परिणाम के आम उदाहरण हैं। हालांकि गंभीर दुष्परिणाम की संभावना होती है जिसके अंतर्गत गंभीर एलर्जिक रिऐक्शन आते हैं। हालांकि, इन दुष्परिणामों का उत्पन्न होना अत्यंत विरले होता है। (आपके चिकित्सक विशेष टीकों के जोखिमों के बारे में बता सकते हैं; विश्व स्वास्थ्य संगठन की वेबसाइट से अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।)। टीकाकरण के संभावित दुष्परिणामों पर विचार करते समय, इसे संदर्भ के साथ करना महत्वपूर्ण होता है। हालांकि कुछ दुष्परिणाम गंभीर होते हैं, लेकिन वे अत्यंत विरले होते हैं। यह याद रखना अहम है कि टीका नहीं लेने के फैसले का गंभीर खतरा है। टीके घातक संक्रामक रोगों से सुरक्षा प्रदान करते हैं; टीका न लेने से इस रोगों से संक्रमित होने और इसे दूसरों में प्रसारित होने का खतरा बढ़ जाता है।

  22. ओपार

  23. क्य हम टीकों के साथ पर्याप्त सुरक्षा परीक्षण करते हैं?

    टीकों को स्वीकृत करने से पहले बार-बार मनुष्यों में जांच किया जाता है, और उनके जारी होने के बाद दुष्परिणामों के लिए लगातार उनकी निगरानी की जाती है।

  24. ओपार

  25. क्या टीकों में गिराए गए भ्रूण का ऊतक या जिलेटिन होता है?

    रुबेला के टीके के वायरस, जो MMR (खसरा, गलसुआ, और रुबेला) शॉट में होता है, का संवर्धन मानव सेल लाइनों के प्रयोग से किया जाता है। इनमें से कुछ सेल लाइनों का शुरुआत भ्रूण ऊतकों से की गई थी जिसे 1960 के दशक में कानूनी गर्भपातों से लिया गया था। रुबेला के टीका के निर्माण के लिए किसी नए भ्रूण ऊतक की जरूरत नहीं होती। कुछ टीकों में स्थितिरिकरण सामग्री के रूप में जिलेटिन शामिल होता है। यदि आपको जिलेटिन के बारे में कुछ पूछना हो, या आप या आपके बच्चे को जिलेटिन से एलर्जी है तो, अपने चिकित्सक से संपर्क करें।

  26. ओपार

  27. क्या यह सच है कि बेहतर स्वच्छता और पोषण से मृत्यु और रोग की दरों में कमी आती है, न कि टीकों से?

    अन्य कारकों के साथ-साथ उच्च स्वच्छता और पोषण, निश्चित रूप से कुछ रोगों की घटना और तीव्रता को कम सकते हैं। टीका से पहले और टीका के बाद किसी रोग की संख्या का डेटा प्रलेखन, हालांकि, दर्शाता है कि टीके बीमारी की दरों में बड़ी गिरावट के लिए भारी रूप से जिम्मेदार होते हैं। उदाहरण के लिए, विकसित देशों में जैसे अमेरिका में, खसरा के मामलों की संख्या वर्ष 1950 और 1963 के बीच प्रति वर्ष 300,000 से लेकर 800,000 थी, जब खसरा के टीकों का प्रयोग पहली बार व्यापक रूप से किया गया था। वर्ष 1965 तक, यूएस खसरा के मामलों में नाटकीय ढंग से कमी आनी शुरू हुई। 1968 में, लगभग 22,000 मामलों की सूचना मिली (जो केवल तीन वर्षों में 800,000 मामलों में 97.25% की कमी है); 1998 तक, मामलों की संख्या औसतन लगभग 100 प्रति वर्ष या इससे भी कम रह गई। उन रोगों में भी टीकाकरण के बाद इसी तरह की कमी आई जिनके लिए टीके उपलब्ध हैं। शायद यह सर्वोत्तम प्रमाण है कि टीके, न कि स्वच्छता या पोषण, बीमारी और चेचक के टीके से होने वाली मृत्यु दरों में भारी कमी के लिए जिम्मेदार हैं। यदि स्वच्छता और पोषण ही केवल संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए पर्याप्त होते तो, अमेरिका में 1990 के दशक के मध्य में छोटी चेचक के टीके की शुरुआत से पहले चेचक की दरों में खासी कमी होती। जबकि इसके विपरीत, 1995 में टीके की शुरुआत से पहले, 1990 के दशक के आरंभ में अमेरिका में चेचक मामलों की संख्या प्रति वर्ष चार मिलियन थी। वर्ष 2004 तक, रोग की घटना में 85% तक की कमी आई।

  28. ओपार

  29. हम अन्य रोगों का उन्मूलन क्यों नहीं कर सकते, जैसा कि हमने स्मॉलपॉक्स का किया?

    सैद्धांतिक रूप से, लगभग कोई भी संक्रामक रोग जिसके लिए एक प्रभावी टीका मौजूद है, वह उन्मूलन योग्य होना चाहिए। पर्याप्त टीकाकरण स्तर और जन स्वास्थ्य संगठनों के बीच उपयुक्त समन्वय के साथ, किसी भी रोग को पैर पसारने से रोका जा सकता है; अंत में, इससे कि यह किसी को संक्रमित करें, इसे अवश्य नष्ट होना चाहिए। (एक उल्लेखनीय अपवाद है टिटनस, जो संक्रामक है लेकिन छुआ-छूत वाला नहीं: यह एक बैक्टीरियम के कारण होता है जो आमतौर पर अन्य स्थानों के साथ-साथ जानवरों के विष्ठा में पाया आता है। इसलिए, क्लोस्ट्रिडियम टेटानी बैक्टीरियम को धरती  से पूरी तरह हटाए बिना टिटनस का उन्मूलन नहीं किया जा सकता। हालांकि, स्मॉलपॉक्स अभिलक्षणों में असाधारण है जिसने इसे उन्मूलन के लिए संवेदनशील बनाया। बहुत से अन्य संक्रामक रोगों के विपरीत, स्मॉलपॉक्स का कोई पशु संग्रह नहीं होता। अर्थात, यह जानवरों की आबादी में नहीं “छुप” सकता और मनुष्यों को संक्रमित करने के लिए दुबारा नहीं उभर सकता, जबकि कुछ रोग ऐसा कर सकते हैं (उदाहरण के लिए, पीत ज्वर कुछ प्राइमेंट्स को संक्रमित कर सकते हैं; यदि कोई मच्छर किसी प्राइमेट को काटता है, तो यह वापस मनुष्यों में वायरस का प्रसार कर सकता है)। बहुत से संक्रामक रोगों के उन्मूलन की दिशा में दूसरी बाधा है दृश्यता (विजिबिलिटी)। स्मॉलपॉक्स से पीड़ित व्यक्ति दिखाई देते थे: स्मॉलपॉक्स के चकत्तों को आसानी से पहचान जा सकता था, इसलिए नई मामले तुरंत पहचान में आ जाते थे। टीकाकरण के प्रयासों को मामलों के स्थान और अन्य व्यक्तियों के संभावित संपर्क पर केंद्रित किया जा सका। इसके विपरीत, पोलियो से संक्रमित लगभग 90% लोगों में इसका कोई लक्षण नहीं दिखाई देता। परिणामस्वरूप, पोलियो वायरस के प्रसार का पता लगाना बहुत कठिन होता है, इस कारण से इसका उन्मूलन कथिन होता है। शायद अधिक महत्वपूर्ण रूप से, स्मॉलपॉक्स के रोगियों में आमतौर पर संक्रामकता (अर्थात, अन्य लोगों को संक्रमित करने की उनकी क्षमता) का चरम पर नहीं पहुंचता जब तक कि स्मॉलपॉक्स के चकत्ते न प्रकट हो जाएं। परिणामस्वरूप, चकत्ते निकलने के बाद संक्रमित व्यक्ति को पृथक करने के लिए की कई त्वरित कार्रवाई से प्राय: उन व्यक्तियों को टीका देने के लिए पर्याप्त समय मिलता है जो पहले इसके संपर्क में आ चुके हैं, और आगे होने वाले संपर्कों से बचाव होता है। बहुत से संक्रामक रोगों की स्थिति में इस प्रकार की कार्रवाई समय का मौका नहीं मिलता। उदाहरण के लिए, खसरा के रोगी, खसरा का चकत्ता निकलने से चार दिन पहले संक्रमणकारी हो सकता है। इसके चलते, वे अनेक लोगों में वायरस फैला सकते हैं इससे पहले किए किसी को पता चले कि वे संक्रमित हैं।

    बहुत से लोग अब भी यह सोचते हैं कि उन्मूलन कुछ निश्चित रोगों के लिए संभव है। पोलियो और गिनी वॉर्म रोग (ड्रैकनक्युलिएसिस) के उन्मूलन की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, बहुत से क्षेत्रों में इसका उन्मूलन किया जा चुका है, लेकिन बहुत से देशों में अभी भी स्थानिक बने हुए हैं। इस बीच कार्टर सेंटर इंटरनेशन टास्क फोर्स फॉर डिजीज इरैडिकेशन ने अनेक अतिरिक्त रोगों की घोषण की जिसमें संभावित रूप से सिस्टेसेर्कोसिस, लिम्फैटिक फिलैरिआसिस (एलिफैंटिआसिस), खसरा, गलसुआ, पोलियो, रुबेला और  यॉज।

  30. ओपार

  31. क्या पोलियो का टीका HIV, कैंसर, मानसिक मंदन, या पुरुषों या महिलाओं के बांझपन से जुड़ा है?

    1990 के दशक में, कुछ आलोचकों ने अक्वायर्ड इम्यून डिफिशिएंसी सिंड्रोम (AIDS) के लिए 1950 के दशक में अफ्रीका में जीवित, कमजोर पोलियो के टीका के परीक्षण को जिम्मेदार ठहराया। आरोप लगाने वालों की यह दलील पेश की कि टीका के निर्माण में चिम्पेंजी की कोशिकाओं का इस्तेमाल किया गया था, और यह किए वे कोशिकाएं उस वायरस से संक्रमित थी जो कभी-कभी चिम्प्स को प्रभावित करती है: सिमिअन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस या SIV. जब अफ्रीका में बच्चों को टीका दिया गया था, तब उन्होंने कहा था कि SIV ह्युमैन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस, या HIV में बदल सकता है, जिससे AIDS होता है। हालांकि, आरोप कई कारणों से प्रामाणिक रूप से गलत साबित हुए थे। सबसे महत्वपूर्ण, कमजोर पोलियो के टीके का निर्माण चिम्पेंजी की कोशिकाओं से नहीं किया गया था, बल्कि बंदरों की कोशिकाओं से किया गया था। बाद में टीकों का परीक्षण एक ऐसी तकनीकी के प्रयोग से किया गया जिससे वायरल DNA (PCR तकनीक, या पॉलिमेरैज श्रृंखला अभिक्रिया) का पता लगाया जा सकता है; इसमें SIV या HIV नहीं पाया गया। अल्बामा के बर्मिंघम युनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 2006 में दिखाया कि यद्यपि HIV दरअसल SIV का एक व्युत्पन्न था, कैमरून में चिम्पेंजीज जो 1930 के दशक में SIV से संक्रमित थे, वे AIDS महामारी के सबसे संभावी स्रोत थे - अफ्रीका में कमजोर पोलियो के टीका के परीक्षण के दशकों पहले।

    20वीं शताब्दी के मध्य में पोलियो के टीकों का निर्माण बंदरों की कोशिकाओं से किया जाता था। उनके लाइसेंस प्राप्त होने के कुछ वर्षों बाद, माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स ने दोनों टीकों में बंदर के वायरस पाए। इस वायरस का नाम सिमिअन वायरस 40 (SV40) रखा गया था। निर्माताओं ने टीका से वायरस हटाने के लिए तेजी से अपने निर्माण की विधि को बदल दिया। इस बात की संभावना नहीं थी कि संदूषित टीकों से किसी को नुकसान पहुंचा हो। अध्ययनों से पता चला कि जिन बच्चों में SV40 वाला टीका दिया गया है उन बच्चों में SV40 के लिए एंटीबॉडीज विकसित नहीं हुआ; वायरस केवल उनके पाचन तंत्र से होकर निकल गया, कभी कोई संक्रमण पैदा नहीं किया। बच्चों को SV40-संदूषित टीके दिए जाने के बाद आठ वर्षों, पंद्रह वर्षों और तीस वर्षों तक चले अध्ययनों से पता चला कि उन्हें भी ठीक वैसी ही कैंसर की घटना हुई थी जैसी किए टीका नहीं लिए हुए समूहों की थी। किसी भी विश्वसनीय साक्ष्यों से यह पता नहीं चलता है कि SV40 के कारण कभी मनुष्यों में कैंसर हुआ था।

    पोलियो का टीका के संबंध में कुछ निश्चित घार्मिक नेताओं द्वारा अनेक भ्रांतियां फैलाई जाती हैं और उनके पास कोई तथ्य या प्रमाण नहीं होता। बच्चों में कैंसर, बांझपन, HIV, या मानसिक मंदन और पोलियो टीका के बीच कोई सहसंबंध नहीं है। हालांकि, अपने बच्चे को पोलियो का टीका नहीं देने से स्थायी शारीरिक विकलांगता हो सकती है।

  32. ओपार

  33. BCG का टीका लेना बच्चों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

    पाकिस्तान, भारत और अफगानिस्तान जैसे विकासशील देशों में, जहां TB के अनेक मामले हैं, राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रमों के भाग के रूप में बैसिलस कैल्मेट-गुएरिन (BCG) टीका का प्रयोग किया जाता है। टीका, TB के जीवाणु के कारण होने वाले फेफड़ा-संबंधी रोग से बच्चों को सुरक्षित नहीं रखता है, और न ही यह सक्रिय रोग का रूप लेने वाले सुप्त TB संक्रमण से रक्षा करता है। हालांकि, यह बच्चों में होने वाली कुछ गंभीर जटिलताओं को रोकता है जैसे TB मेनिंजाइटिस। टीका का प्रयोग आमतौर पर वयस्कों में नहीं किया जाता, और बच्चों में टीका रोग के प्रसार को नहीं रोकता। BCG के टीके का प्रयोग 1921 से किया जा रहा है। बहुत से शोधकर्ता क्षय रोग के अधिक प्रभावकारी टीके के निर्माण के लिए काम कर रहे हैं। एक ऐसे टीके के विकसित होने की उम्मीद है जो क्षय रोग के संक्रमण की रोकथाम करेगा, जिससे रोग के दुनिया भर के बोझ को कम करेगा और साथ ही TB के जीवाणु का प्रसार कम होगा।

  34. ओपार

  35. मुझे लीवर की खराबी नहीं है और न ही मेरे परिवार के लोगों को हेपाटाइटिस है। क्यों हेपाटाइटिस B का टीका शिशुओं के लिए महत्वपूर्ण है?

    हेपाटाइटिस B विषाणु (HBV) शरीर के संक्रमणकारी द्रवों (जैसे रक्त, लार, और वीर्य) के संपर्क में आने से फैल सकता है। यह लैंगिक रूप से प्रसारित हो सकता है, या इंजैक्शन में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों जैसे सूई, टांके को साझा करने से, संक्रमित मां के बच्चे में, संक्रमित व्यक्ति के खुले फोड़ों या घावों के संपर्क में आने से, और संक्रमित व्यक्ति के साथ रेज़र या टूथब्रश साझा करने से फैल सकता है। दांत से काटने की स्थिति में लार रोग के प्रसार का एक माध्यम बन सकता है। तेज HBV संक्रमित लगभग 95% वयस्क स्वस्थ होते हैं और स्थायी रूप से संक्रमित नहीं होते, हालांकि तेज चरण में वे शरीर के उत्सर्जनों के जरिए दूसरे व्यक्ति को संक्रमित कर सकते हैं। दूसरे लोग स्थायी रूप से संक्रमित हो सकते हैं - और लंबे समय (कुछ मामलों में कई वर्ष) में अन्य लोगों को संक्रमित कर सकते हैं - और उन्हें गंभीर लीवर की बीमारी का खतरा होता है। बच्चों के लिए परिस्थिति दूसरी होती है : HBV से संक्रमित नवजात शिशु एवं बच्चे में स्थायी संक्रमण की संभावना वयस्क की तुलना में अधिक होती है और इसलिए जटिलताएं गंभीर होती हैं और देर से उत्पन्न होती हैं। HBV के स्थायी संक्रमण के कारण सिरोसिस, लीवर की खराबी, और लीवर कैंसर हो सकता है। इसलिए, इस जानलेवा बीमारी की रोकथाम के लिए टीका एक प्रभावी उपाय है।

  36. ओपार

  37. टिटनस का टीके से मेरे बच्चे को क्या करना है? वह कहीं भी नहीं गिरा और न ही उसे कोई कट का जख्म है।

    तंत्रिका तंत्र का एक रोग है जो क्लोट्रिडियम टेटानी नामक वायरस के कारण होता है जो वातावरण में व्यापक रूप से मौजूद है। यह बैक्टीरियम दो एक्सोटॉक्सिन पैदा करता है, इसमें से एक (टेटानोस्पैस्मिन) है न्यूरोटॉक्सिन जिसके कारण टिटनस के लक्षण उत्पन्न होते हैं। जीवाणु यह न्यूरोटॉक्सिन ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में पैदा करता है जैसे गहरे घावों और नाभि-रज्जु में, यदि इसे रोगाणुयुक्त उपकरण से काटा जाता है।

    10% से 20% टिटनस के मामलों में मृत्यु होती है, हालांकि 60 से अधिक वर्ष की आयु के रोगियों में और अप्रतिरक्षित व्यक्तियों में मृत्यु दरें अधिक होने की संभावना होती है। सूचित टिटनस के सबसे सामान्य प्रकार ("जेनरलाइज्ड टिटनस") में, स्पैज्म 3-4 हफ्तों तक जारी रहता है, और ठीक होने में महीनों लग जाते हैं। वर्ष 2014 में, दुनिया भर में टिटनस के 11,367 मामले थे और 5 वर्षों के अंदर (2011) लगभग 72,600 लोगों की मृत्यु हुई। बाल्यावस्था प्रतिरक्षण कार्यक्रम द्वारा टिटनस टॉक्साइड युक्त टीका (इसे प्राय: DTP, DTaP, or DTwP कहा जाता है) के अनेक खुराक की अनुशंसा की जाती है ताकि टिटनस से सुरक्षा मिल सके, जहां पहली खुराक की शुरुआत दो महीने की आयु से होनी चाहिए। टिटनस टॉक्साइड युक्त टीके की बूस्टर खुराकों की सलाह जीवन भर दी जाती है।

  38. ओपार

  39. टाइफाइड का टीका लेना क्यों महत्वपूर्ण है? और क्यों कुछ डॉक्टर इसे बसंत ऋतु में लेने की सलाह देते हैं?

    टाइफाइड का बुखार संदूषित भोजन और पानी के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। इसका प्रसार विष्ठा-मुंह मार्ग से होता है, अर्थात, संदूषित विष्ठा (और कभी-कभी पेशाब) जलापूर्तियों या खाद्य आपूर्तियों में प्रवेश कर जाते हैं, जो हो सकता है कि बाद में दूसरों के मुंह के जरिए पेट में चले जाए और संक्रमित करे।   दुनिया भर में हर साल टाइफाइड बुखार के लगभग 21 मिलियन मामले उत्पन्न होते हैं और 220,000 मौंतें हो जाती हैं। पाकिस्तान, भारत, नाइजीरिया, और अफगानिस्तान जैसे अनेक विकासशील देशों में, बिजली की कमी के कारण खाद्य पदार्थों को सुरक्षित तापमान पर नहीं रखा जाता और स्वच्छ और साफ-सफाई की स्थिति ठीक नहीं होती। इसलिए, टाइफाइड का बुखार उत्पन्न करने वाले जीवाणु के प्रसार का खतरा गर्मियों के महीनों में अधिक होता है, और टाइफाइड बुखार के बचावकारी टीके लेने की सलाह गर्मी के महीनों से पहले दी जाती है। टाइफाइड बुखार के टीके लेने की सलाह उन क्षेत्रों में तीन से सात वर्षों तक लेने की सलाह दी जाती है जहां इसका प्रयोग नियमित टीके के रूप में होता है।


स्रोत

सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन। Prevention and Control of Influenza with Vaccines: Recommendations of the Advisory Committee on Immunization Practices, United States, 2015-16 Influenza Season. 16 जून 2016 को प्रयुक्त।

सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन। History and Epidemiology of Global Smallpox Eradication (10.4 MB). 14 जून 2016 को प्रयुक्त।

Children’s Hospital of Philadelphia. Vaccine Safety: Immune System and Health. 16 जून 2016 को प्रयुक्त।

Children’s Hospital of Philadelphia. Are Vaccines Safe? 16 जून 2016 को प्रयुक्त।

सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन। Varicella (Chickenpox) Vaccine Q&A. 18/4/2017 को प्रयुक्त।

The Carter Center. International Task Force for Disease Eradication. 18/4/2017 को प्रयुक्त।

MedPage Today. AAAAI: Egg Allergy No Bar to Flu Shot. 17/4/2017 को प्रयुक्त।

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अंतिम अपडेट 18 अप्रैल 2017