मानव प्रतिरक्षा प्रणाली और संक्रामक रोग

सभी सजीव रोग पैदा करने वाले कारकों के हमले से प्रभावित हो सकते हैं। यहां तक कि जीवाणुओं में, जो अत्यंत छोटे होते हैं, किसी पिन के हेड पर मिलियन की संख्या फिट हो सकते हैं, वायरस द्वारा होने वाले संक्रमण के खिलाफ संरक्षण की प्रणालियां होती हैं। इस प्रकार का संरक्षण बहुत परिष्कृत हो जाता है क्योंकि सूक्ष्मजीवी अधिक जटिल बन जाते हैं।

बहुकोशिकीय जंतुओं में विशिष्ट कोशिकाएं या ऊतक होते हैं जो संक्रमण के खतरे से निपटते हैं। इन अनुक्रियाओं में से कुछ तत्काल होती हैं ताकि संक्रमण कारक त्वरित रूप से निहित हो सके। अन्य अनुक्रियाएं धीमी होती हैं लेकिन संक्रमण कारक के लिए अधिक अनुकूल होते हैं। ये सुरक्षा समग्र रूप से प्रतिरक्षी तंत्र कहलाते हैं। मानव प्रतिरक्षी तंत्र, सशक्त रूप से खतरनाक कीटाणुओं के दुनिया में हमारी जीवित करने के लिए अत्यंत आवश्यक होता है, और यहां तक कि इस तंत्र की एक शाखा के भी गंभीर रूप से खराब होने पर गंभीर पक्षाघात हो सकता है, यहां तक कि जानलेवा संक्रमण भी हो सकता है।

गैर-विशिष्ट (अंतर्जात) प्रतिरक्षी क्षमता

मानव प्रतिरक्षी तंत्र में दो स्तर की प्रतिरक्षी क्षमता होती है: विशिष्ट और गैर-विशिष्ट प्रतिरक्षी क्षमता। गैर-विशिष्ट प्रतिरक्षी क्षमता, जिसे अंतर्जात गैर-विशिष्ट प्रतिरक्षी क्षमता भी कहते हैं, के जरिए मानव शरीर अपने आप को ऐसे बाहरी पदार्थों से रक्षा करता है जो कथित रूप से हानिकाकर माने जाते हैं। वायरस जितने सूक्ष्म कीटाणु और जीवाणु पर हमले हो सकते हैं, जैसे बड़े सूक्ष्मजीवी होते हैं जैसे कृमि। इन सीक्ष्मजीवियों को समग्र रूप से पैथोजन कहा जाता है जब वे होस्ट में रोग पैदा करते हैं।

सभी जंतुओं में अंतर्जात प्रतिरक्षी क्षमता होती है जो सामान्य पैथोजन के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती है। सुरक्षा की इन पहली लाइनों में बाहरी अवरोध जैसे त्वचा और म्युकस झिल्ली शामिल हैं। जब पैथोजन बाहरी अवरोधों को पार करता है, उदाहरण के लिए त्वचा के जख के जरिए या सांसों के जरिए फेफड़े में जाने पर, वे गंभीर नुकसान पैदा कर सकते हैं।

कुछ सफेद रक्त कोशिकाएं (फैगोसाइट्स) उन पैथोजंस के साथ मुकाबला करती हैं जो इसे तीव्र बाह्य रक्षा बनाते हैं। फैगोसाइट किसी पैथोजन के चारों ओर से घेरता है, इसे अंदर लेता है, और इसे निष्क्रिय करता है।

विशिष्ट प्रतिरक्षी क्षमता

जहां स्वस्थ फैगोसाइट्स बेहतर स्वस्थ के लिए महत्वपूर्ण होता है, वहीं ये कुछ निश्चित संक्रामक खतरों का सामना करने में अक्षम होता है। विशिष्ट प्रतिरक्षा क्षमता अंतर्जात प्रतिरक्षी तंत्र के फैगोसाइट्स के कार्य और अन्य अवयवों के लिए पूरक होती है।

अंतर्जात प्रतिरक्षा क्षमता की तुलना में, विशिष्ट प्रतिरक्षा क्षमता किसी विशिष्ट पैथोजन के खिलाफ लक्षित अनुक्रिया करती है। केवल कशेरुकियों में ही विशिष्ट प्रतिरक्षा अनुक्रियाएं होती हैं।

दो प्रकार की सफेद रक्त कोशिकाएं, जिन्हें लिम्फोसाइट्स कहते हैं, विशिष्ट प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के लिए अहम होते हैं। लिम्फोसाइट्स का निर्माण अस्थि मज्जा में होता है, और अनेक उप-प्रकारों में परिपक्व होते हैं। इनमें से सामान्य दो प्रकार हैं T कोशिकाएं और B कोशिकाएं।

एंटीजन एक बाहरी पदार्थ होता है जो T और B कोशिकाओं की अनुक्रिया को सक्रिय करता है। मानव शरीर में B और T कोशिकाएं होती हैं जो लाखों विभिन्न एंटीजन के लिए विशिष्ट होती हैं। हम प्राय: एंटीजंस को कीटाणुओं के भाग के रूप में सोचते हैं, लेकिन एंटीजन अन्य चीजों में भी मौजूद रह सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति को ऐसा रक्त आधान किया जाता है जो उसके रक्त प्रकार से मेल नहीं खाता है, तो यह T और B कोशिकाओं से रिऐक्शंस को ट्रिगर कर सकता है।

T और B कोशिकाओं पर विचार करने का एक उपयोगी तरीका निम्नलिखित है: B कोशिकाओं की एक ऐसी विशेषता होती है जो अत्यावश्यक होती है। वे प्लाज्मा कोशिकाओं में परिपक्व हो सकती हैं और विभेदित हो सकती हैं जो एंटीबॉडी नामक एक प्रोटीन का निर्माण करती हैं। यह प्रोटीन विशेष रूप से किसी खास एंटीजन के लिए लक्षित होता है। हालांकि, एंटीबॉडी के निर्माण के लिए केवल B कोशिकाएं बहुत उपयुक्त नहीं होतीं और एक इस बात का संकेत प्रदान करने के लिए T कोशिकाओं पर निर्भर कि उन्हें अब परिपक्वन की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। जब उचित रूप से सूचित B कोशिका उस एंटीजन की पहचान करती है जिसके प्रति अनुक्रिया देने के लिए इसे कोड किया जाता है, तब यह अनेक प्लाज्मा कोशिकाओं में विभाजित होती है और निर्माण करती है। तब प्लाज्मा कोशिकाएं बड़ी संख्या में एंटीबॉडीज का स्राव करती हैं, जो रक्त में परिसंचरण कर रहे विशिष्ट एंटीजन से मुकाबला करते हैं।

T कोशिकाएं तब सक्रिय होती हैं जब कोई विशेष फैगोसाइट, जिसे एंटीजन-प्रेजेंटिंग सेल (APC) कहा जाता है, उस एंटीजन को प्रदर्शित करता है जिसके लिए T कोशिका विशिष्ट होती है। यह मिश्रित कोशिका (अधिकांश स्थिति में मनुष्य लेकिन T कोशिका के लिए एंटीजन प्रदर्शित करती है) विशिष्ट प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के लिए विभिन्न अवयवों के लिए एक ट्रिगर है।

T कोशिका का एक उपप्रकार, जिसे T कोशिका हेल्पर कोशिका कहा जाता है, अनेक भूमिकाएं निभाती है। T हेल्पर कोशिकाएं रासायनों का स्राव करता है

·       प्लाज्मा कोशिकाओं में विभाजित होने के लिए B कोशिकाओं की मदद करता है

·       कीटाणुओं को नष्ट करने के लिए फैगोसाइट को आमंत्रित करता है

·       किलर T कोशिकाओं को सक्रिय करता है

सक्रिय हो जाने पर, किलर T कोशिकाएं शरीर की संक्रमित कोशिकाओं की पहचान करती हैं और उन्हें नष्ट करती हैं।

रेगुलेटरी T कोशिकाएं (जिन्हें सप्रेसर T कोशिकाएं भी कहते हैं) प्रतिरक्षी अनुक्रिया को नियंत्रित करने में मदद करती हैं। वे तब पहचान करती हैं जब खतरा निहित हो चुका होता है और फिर हमले रोकने के लिए संकेत भेजती हैं।

अंग एवं ऊतक

विशिष्ट प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करने वाली कोशिकाएं रक्त में परिसंचरित होती हैं, लेकिन वे अनेक किस्म के अंगों में भी पाई जाती हैं। अंग के अंदर, प्रतिरक्षा ऊतक प्रतिरक्षी कोशिकाओं में परिपक्वन करते हैं, पैथोजन को पकड़ते हैं और एक ऐसा स्थान प्रदान करते हैं जहां प्रतिरक्षी कोशिकाएं एक दूसरे के संपर्क में आ सकते हैं और विशिष्ट अनुक्रिया डाल सकते हैं। प्रतिरक्षी तंत्र में शामिल अंगों एवं ऊतकों में थाइमस, अस्थि मज्जा, लिम्फ ग्रंथि, प्लीहा, अपेंडिक्स, टॉन्सिल और पेयर्स पैचेज (छोटी आंत में)।

संक्रमन और रोग

संक्रमण तब उत्पन्न होता है जब कोई पैथोजन शरीर की कोशिकाओं पर हमला करता और प्रजनन करता है। संक्रमण से प्राय: प्रतिरक्षी अनुक्रिया उत्पन्न होती है। यदि अनुक्रिया त्वरित और प्रभावी होती है, तो संक्रमण समाप्त हो जाता है या इतने कम समय तक निहित रहता है कि रोग पैदा नहीं हो पाता।

कभी-कभी संक्रमण से रोग उत्पन्न हो जाते हैं। (यहां हम संक्रामक रोगों पर चर्चा करेंगे, और इसे संक्रमण की उस अवस्था के रूप में परिभाषित करेंगे जो लक्षणों या रुग्णता के प्रमाण द्वारा प्रकट होती हैं।) रोग उत्पन्न हो सकता है जब प्रतिरक्षा क्षमता कम होती है या खराब होती है, जब पैथोजन की उग्रता (होस्ट कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त करने की क्षमता) उच्च होती है, और जब शरीर में पैथोजन की संख्या बहुत अधिक होती है।

संक्रामक रोग के आधार पर, लक्षणों में बड़ा अंतर हो सकता है। बुखार संक्रमण के प्रति आम अनुक्रिया है:शरीर का उच्च तापमान प्रतिरक्षा अनुक्रिया को बढ़ा सकता है और पैथोजन के लिए एक प्रतिकूल माहौल पैदा करता है। संक्रमित क्षेत्र में द्रव के बढ़ने से उत्पन्न प्रदाह, या सूजन इस बात का एक संकेत है कि सफेद रक्त कोशिकाएं हमले की स्थिति में हैं और प्रतिरक्षी अनुक्रिया में शामिल पदार्थों का स्राव कर रही हैं।

टीकाकरण किसी विशिष्ट प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को उत्प्रेरित करने का काम करता है जिससे किसी निश्चित पैथोजन के लिए विशिष्ट मेमरी B और T कोशिकाओं का निर्माण होता है। ये मेमरी कोशिकाएं शरीर में बनी रहती हैं और त्वरित और प्रभावी अनुक्रिया दे सकती हैं जब शरीर दुबारा पैथोजन का सामना करता है।

टीकाकरण पर अधिक जानकारी के लिए, टीके कैसे काम करते हैं क्रियाकलाप देखें।


स्रोत

Hunt R. Immunology. Microbiology and Immunology Online. University of South Carolina. 31/3/2017 को प्रयुक्त।

The Merck Manual: Home Edition. Biology of Infectious Disease. 31/3/2017 को प्रयुक्त।

 

अंतिम अपडेट  31 मार्च 2017