इन्फ्लुएंजा महामारी

इन्फ्लुएंजा एक संक्रामक रोग है, जिसे आमतौर पर बुखार, मांसपेशी में दर्द, गले का खराश, थकावट के रूप में लक्षित होता है। यह आमतौर पर एक या दो प्रकार के इन्फ्लुएंजा वायरस द्वारा होता है: इन्फ्लुएंजा A और इन्फ्लुएंजा B. (इन्फ्लुएंजा C के कारण युवा लोगों में ऊपरी श्वसन नली का संक्रमण होता है लेकिन यह अन्य दो प्रकारों की तरह आम नहीं है।) इन्फ्लुएंजा से ग्रसित ज्यादातर लोग कई दिनों तक बीमार महसूस करते हैं और फिर ठीक हो जाते हैं। कुछ स्थितियों में, इन्फ्लुएंजा के कारण न्युमोनिया हो सकता है, अन्य जटिलताएं और यहां तक की मृत्यु भी हो सकती है।

वायरस से लोगों की प्रतिरक्षा पहले के समय में उनके वायरस के संपर्क में आने पर निर्भर करती है, यह संपर्क संक्रमण या उस वायरस के टीके के रूप में हो सकता है। दोनों ही स्थिति में प्रतिरक्षी तंत्र वायरस को “याद” रखता है और वायरस-विशिष्ट एंटीबॉडीज का निर्माण करता है जो वायरस को उदासीन बना देता है जब यह अगली बार शरीर में प्रवेश करता है। लेकिन इन्फ्लुएंजा वायरस रूपांतरित, या तेजी से बदल सकते हैं। हरेक कुछ वर्षों में, इन्फ्लुएंजा वायरस इतने बदल जाते हैं कि एक नया स्ट्रेन बन जाता है। इस प्रक्रिया को एंटीजेनिक ड्रिफ्ट कहा जाता है। जो व्यक्ति उस वायरस के संबंधित स्ट्रेन के संपर्क में आ चुके होते हैं, उनमें पहले से एंटीबॉडीज के रूप में कुछ प्रतिरक्षण मौजूद होने की संभावना होती है, और होने वाली बीमारी तीव्रता कम हो जाती है। कभी-कभी, वायरस में होने वाले एक बड़े परिवर्तन से एक ऐसे अलग तरीके के स्ट्रेन का निर्माण होता है जो मनुष्यों में पहले से या तो बहुत नगण्य होता है या बिल्कुल नहीं होता। इस प्रक्रिया को एंटीजेनिक शिफ्ट कहा जाता है, और इसके कारण व्यापक और गंभीर बीमारी हो सकती है।

कोई एंफ्लुएंजा महामारी तब उत्पन्न होती है जब एंटीजेनिक शिफ्ट से एंफ्लुएंजा वायरस के नए सबटाइप या स्ट्रेन का निर्माण होता है और दुनिया भर में फैल जाता है। 20वीं शताब्दी में तीन महामारियां फैली थी, वे सभी इन्फ्लुएंजा A स्ट्रेन में एंटीजेनिक शिफ्ट के कारण फैली थी। जनन संबंधी परिवर्तनों के एक अनोखे संयोजन के कारण वर्ष 2009 में एक महामारी फैली थी जो 20वीं शताब्दी में हुए प्रकोपों से कम जानलेवा थी। 1918-19 की महामारी ऐसी घटना थी जिससे अन्य सभी महामारियों की तुलना की जाती है क्योंकि इसके मृतकों की संख्या अप्रत्याशित थी।

स्पैनिश इन्फ्लुएंजा, 1918-19

किसी भी महामारी में इतनी जानें नहीं गई जितनी कि 1918-1919 में हुई स्पैनिश इन्फ्लुएंजा में गई थी। दुनिया भर में, लगभग 40 मिलियन लोगों की मृत्यु हुई थी क्योंकि वायरस से होने वाली इस बीमारी से शहर के शहर मिट गए (कुछ आकलनों के मुताबिक मृतकों की संख्या 70 मिलियन थी)। बीमारी के पहले एहसास के कुछ ही घंटों के अंदर लोगों के मरने की घटनाएं भरी पड़ी हैं। 50 वर्ष की आयु तक के वयस्कों की मृत्यु दर सबसे अधिक थी, जो अज्ञात कारणों से, इन्फ्लुएंजा के इस स्ट्रेन से होने वाली गंभीर बीमारी के प्रति विशेष रूप से कमजोर थे।

वर्ष 1918 की वसंत ऋतु में, अधिकारियों ने यूरोप से बड़ी संख्या में मामले की जानकारी दी, हालांकि यह फ्लू प्रचलित प्रजाति से अधिक खतरनाक नहीं लगती थी। हालांकि, ग्रीष्म ऋतु के उत्तरार्ध में, वायरस अधिक जानलेवा हो गया। जल्द ही, संक्रमण की लहरों ने शहरों, देशों और महाद्वीपों को अपनी चपेट में ले लिया जिससे अस्पतालों और चिकित्सा कर्मियों पर अत्यधिक दबाव बन गया। वर्ष 1918 की शरद ऋतु में स्पैन में हुए इस विनाशकारी फ्लू के कारण स्पैनिश इन्फ्लुएंजा नाम दिया गया।

वर्ष 1918 के इन्फ्लुएंजा का न तो कोई इलाज था और न ही कोई प्रभावी टीका। वास्तव में, उस समय के अधिकांश विशेषज्ञों ने सोचा कि इन्फ्लुएंजा एक बैक्टीरियम के कारण हुआ न कि किसी वायरस के कारण। और यद्यपि बहुत से अन्य रोगों के लिए टीके मौजूद थे, और कुछ अनुपयोगी और संभावित रूप से हानिरहित एंटी-फ्लू टीके मनगढ़ंत थे, एक प्रभावी इन्फ्लुएंजा टीका दशकों दूर था। इन्फ्लुएंजा के रूप में जागृत होने वाले इस उग्र जीवाणु जनित संक्रमण के उपचार के लिए कोई भी एंटीबायोटिक उपलब्ध नहीं थे।

1919 के अंतिम वसंत ऋतु में स्पैनिश इन्फ्लुएंजा समाप्त होने लगा था। 1920 के दशक में वायरस सापेक्षिक गैरहानिकारकता में बदलने लगा और अनेक दशकों तक लगातार संचरित होता रहा। वैज्ञानिक 1918-19 की महामारी के लिए जिम्मेदार वायरस को H1N1 इन्फ्लुएंजा के रूप में वर्गीकृत करने में सक्षम थे।

एशियन इन्फ्लुएंजा, 1957-58

1918 की महामारी के बाद इन्फ्लुएंजा हर साल होने लगा, लेकिन कोई नया नहीं, उग्र इन्फ्लुएंजा प्रकार का उद्भव वर्ष 1957 की शुरुआत में हुआ। इसी साल के फरवरी महीने में, चीन के जरिए चलते हुए एक फ्लू की एक गंभीर लहर का साक्ष्य मिलना आरंभ हो गया।

माउरिस हिलेमैन, अमेरिका के माइक्रोबायोलॉजिस्ट, वाल्टर रीड आर्मी मेडिकल सेंटर, ने एशिया में इंफ्जुएंजा के बारे में न्यूज रिपोर्ट्स का अध्ययन किया। अनेक मामलों पर अध्ययन करने पर उन्हें लगा कि नए प्रकार के इन्फ्लुएंजा का विकास हो रहा है और महामारी का संकट उत्पन्न हो रहा है।

हिलेमैन और उनके टीम ने अमेरिका के सर्विसमेन से वायरस का एक नमूना लिया। उन्होंने जल्दी ही यह तय किया कि अधिकांश लोगों में नए इन्फ्लुएंजा वायरस, जो H2N2 प्रकार था, से एंटीबॉडी प्रतिरक्षण की कमी है। केवल कुछ ही लोगों में, जो 1889-1890 की इंफ्जुएंजा महामारी में बच गए थे, नए वायरस की प्रतिक्रिया के लिए एंटीबॉडी मौजूद थे।

हिलेमैन ने जल्दी-जल्दी में वायरस के नमूने को निर्माताओं के पास भेजकर टीका सुरक्षा तैयार किया और उनसे विनती की कि वे चार महीनों तक टीके का निर्माण करते रहें।

हॉन्ग कॉन्ग फ्लू, 1968-69

दस वर्ष पहले हुई महामारी में, नए इन्फ्लुएंजा A स्ट्रेन के पहले संकेत एशिया में उभर कर सामने आए थे। वायरस (H3N2) 1968-1969 दुनिया भर में फैल गया। इस महामारी के कारण 1 से 4 मिलियन लोगों की मौत हुई थी। टीका उपलब्ध हुआ लेकिन इसका निर्माण इतना पहले नहीं हो सका जिससे पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जा सकती। कुछ वैज्ञानिकों ने सोचा कि 1957-58 के एशियन फ्लू की समानता से लोगों को अधिक गंभीर बीमारी से सुरक्षित होने में मदद मिलेगी। (एशियन फ्लू की तरह ही, हॉन्ग कॉन्ग फ्लू में भी N2 कॉम्पोनेंट मौजूद था।)

एवियन फ्लू का संकट, 1997-वर्तमान

इन्फ्लुएंजा का अगला भारी संकट एक बार फिर एशिया से उभरा, जहां एवियन इन्फ्लुएंजा (H5N1) से पक्षी संक्रमित हुए और मनुष्यों में प्रसारित हुआ। वायरस के कारण अनेक लोग बीमार हुए और मौंतें हुई।

प्रकोप विशेषकर 2003-2004 में गंभीर था, जब फ्लू के लाखों मुर्गों और जलपक्षियों की मौत हो गई। हालांकि, वायरस का प्रसार व्यक्ति से व्यक्ति में नहीं हुआ, लेकिन केवल पक्षियों में हुआ और फिर मनुष्यों में। मनुष्य से मनुष्य में प्रसार न होने के कारण रोग की घटना सीमित रही। दुनिया भर में मुर्गों के समूहों को नष्ट किए जाने के बाद, संकट कम हुआ। बर्ड फ्लू का संकट बना हुआ है, हालांकि, उसमें जानलेवा स्ट्रेन पैदा हो सकता है जो मानव से मानव में प्रसारित होने में सक्षम होगा जिससे महामारी उत्पन्न हो सकता है।

नोवेल H1N1, 2009

हालिया महामारी इन्फ्लुएंजा मध्य मार्च 2009 में मैक्सिको में प्रकट हुआ था। यह फ्लू खासकर शुरुआत में ही समस्या उत्पन्न करते हुए प्रकट हुआ, क्योंकि मैक्सिको में मृत्यु दर असाधारण रूप से उच्च पाई गई। जल्द की मामले अमेरिका में भी दिखाई देने लगे, और रोग लगातार फैलता गया। वैज्ञानिकों ने वायरस को इन्फ्लुएंजा A H1N1 के रूप में पहचाना, जैसा कि यह मूल रूप से सूअरों में था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस उभरते संकट पर एक वैश्विक दिशानिर्देश प्रदान किया, और राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय सरकारों ने महामारी इन्फ्लुएंजा योजनाओं का क्रियान्वयन शुरू कर दिया। हालांकि रोग तेजी से प्रसारित हुआ, फिर भी परिणामी बीमारी इतनी गंभीर नहीं हुई जितनी कि शुरुआती मैक्सिकन रिपोर्ट में होने की संभवाना जताई गई थी। इसके बावजूद, आमतौर पर होने वाले मौसमी फ्लू की तुलना में बीमारी के कारण भारी संख्या में बच्चों और युवा वयस्कों की मृत्यु हुई। आमतौर पर, 90% मौसमी फ्लू संबंधित मौंतें 65 से अधिक की आयु के लोगों में होती हैं, जबकि H1N1 से 87% मौंतें 65 वर्ष के अंदर की आयु के लोगों में हुई। इसकी एक संभावित व्याख्या यह है कि 1950 से पहले जन्मे कई लोगों में वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षण पहले से मौजूद था, और संभवत: इसका यह कारण हो सकता है कि 1918 H1N1 फ्लू महामारी से संबंधित वायरस के प्रकार 20वीं शताब्दी में भी संचरित हो रहे थे। हालांकि WHO ने महामारी के दौरान केवल लगभग 18,000 प्रयोगशाला-पुष्टि H1N1 मौंतों की सूचना दी, एक प्रारूप यह दर्शाता है कि वास्तविक संबंधित मौंतें इस आंकड़े से दस गुना अधिक हो सकती हैं (साइमनसेन और अन्य, 2013)।

वैज्ञानिकों द्वारा वायरस की पहचान किए जाने के तुरंत बाद नए H1N1 स्ट्रेन के लिए टीका तैयार करने का व्यापक प्रयास शुरू किया गया। निर्माण प्रक्रिया के दौरान वायरस के वृद्धि धीरे-धीरे हुई, जो मुर्गी के अंडों में वायरस के संवर्धन पर निर्भर है।

2009 H1N1 एंटीजेनिक शिफ्ट या एंटीजेनिक ड्रिफ्ट का परिणाम था? कोई भी नया H- या N-सबटाइप मनुष्यों में प्रवेश नहीं किया है, जो एंटीजेनिक शिफ्ट का संकेत देगा। लेकिन कोई भी वायरस एंटीजेनिक ड्रिफ्ट की परिभाषा से स्पष्ट रूप से मेल खाता है। जैसा किए कि रिपोर्ट का कहना है,

“2009 H1N1 वायरस का उभरना आधुनिक वायरोलॉजी की एक अप्रत्याशित घटना है। 2009 H1N1 वायरस नए सबटाइप की पुरानी परिभाषा के साथ फिट नहीं बैठता है जिसके लिए अधिकांश लोगों में कोई पिछला संक्रमण अनुभव नहीं है। 1977 से, H1N1 वायरस का संचरण जारी है, और 1956 से पहले जन्मे अदिकांश लोगों में H2N2 के पहले के समय के H1N1 के साथ पिछला संक्रमण अनुभव है। 2009 H1N1 वायरस ड्रिफ्ट की पुरानी परिभाषा के साथ भी फिट नहीं बैठता है क्योंकि इसका हाल में संचरित हो रहे मानव मूल के H1N1 वायरस के साथ कोई सीधा विकासमूलक संबंध नहीं है” (सुलिवन, जैकबसन, डाउडल, पोलैंड, 2010)।

महामारी इन्फ्लुएंजा का भविष्य

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2005 में नए महामारी दिशानिर्देश तैयार किए जिससे राष्ट्रीय और स्थानीय प्राधिकारों को अपनी महामारी की तैयारी योजनाओं के समीक्षा करने और अपग्रेड करने में प्रोत्साहन मिला। 1990 के दशक के उत्तरार्ध में बर्ड फ्लू के हुए प्रकोपों के बाद योजनाएं तैयार की गई। 2009 H1N1 महामारी ने जन स्वास्थ्य प्राधिकरणों को महामारी की बीमारियों पर प्रतिक्रिया दिखाने के लिए बनाई गई नई योजनाओं के क्रियान्वयन का एक अवसर प्रदान किया।

2009 की महामारी की प्रतिक्रिया में समूहों ने अध्ययन के मुताबिक इन्फ्लुएंजा टीका के त्वरित विकास और वितरण के लिए अनेक बिंदुओं की आवश्यकता है। उद्योग और जन स्वास्थ्य अधिकारियों ने नई तकनीकों और विधियों का परीक्षण किया ताकि टीका की उपलब्धता बढ़ सके।


स्रोत

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अंतिम अपडेट 31 मार्च 2017