टीका अनुसंधान में रोजगार

बुनियादी टीका अनुसंधान तथा विकास, क्लिनिकल परीक्षणों, उत्पादन तथा लोगों में टीके के वितरण क्षेत्र में कई प्रकार के रोजगार उप्लब्ध होते हैं। ये नौकरियां पूरी दुनिया भर में विश्वविद्यालयों, उद्योगों, सरकारी प्रयोगशालाओं व एजेंसियों, अस्पतालों और टीका वितरण के अग्रिम पंक्ति के कार्यों में उपलब्ध होते हैं।

सामान्यतः ज्यादातर लोग टीकों के क्षेत्र में अपने रोजगार का आरंभ एक पूर्वस्नातक डिग्री, जैसे कि कोशिकीय या आण्विक जीव-विज्ञान, रसायन विज्ञान, जैव-रसायन विज्ञान या सूक्ष्मजीव विज्ञान जैसे विषयों में बैचलर ऑफ साइंस (बीएस) से करते हैं। इन डिग्रियों को हासिल करने से पहले यदि हाई स्कूल में विज्ञान कक्षाओं की प्रबल पृष्ठभूमि रहती है और व्यक्ति में एक स्वाभावित जिज्ञासा की भावना होती है, तो यह अधिक कारगर होता है। कई टीका विकास रोजगारों के लिए मास्टर्स और/या डॉक्टरेट की डिग्री (एमएस और/या पीएचडी) की आवश्यकता होती है, जिसके लिए बीएस डिग्री के बाद कई वर्षों तक अतिरिक्त पढ़ाई करनी पड़ती है।

टीके से जुड़े रोजगार कहां पाएं

टीका विकास अनुसंधान विश्वविद्यालयों, उद्योगों, सरकारों, तथा गैर-लाभ संचालित संगठन के प्रयोगशालाओं में संपन्न होता है और इसके लिए वित्त कई तरीकों से उपलब्ध किया जाता है।

कई विश्वविद्यालय की अनुसंधान परियोजनाएं संघीय सरकारों की एजेंसियों से प्राप्त वित्तीय सहायता पर निर्भर करती हैं। उद्योग जिसमें शामिल होते हैं- फार्मास्युटिकल तथा जैव-प्रौद्योगिगी कंपनियां, अनुबंध प्रयोगशालाएं तथा डायग्नॉस्टिक परीक्षण प्रतिष्ठान, के पास निवेशक के वित्त की पहुंच रहती है या सफल कंपनियों की स्थिति में, सफल व्यापारिक उत्पादन से प्राप्त राजस्व का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे वापस बुनियादी टीका अनुसंधान कार्यों में लगाया जाता है।

संघीय सरकारें भी कई छोटे स्टार्टअप कंपनियों के अनुसंधान के लिए वित्त मुहैय्या कराती हैं, जो प्रायः विशेष परियोजनाओं पर केंद्रित रहती हैं, जैसे कि संभावित जैविक युद्ध की सामग्रियों, जैसे कि ऐंथ्रेक्स के खिलाफ टीकों का विकास या व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याएं, जैसे कि हेपाटाइटिस सी वायरस (एचसीवी) व प्रतिरक्षी तंत्र की क्षमता कम करने वाला विषाणु या ह्युमन इम्युनोडिफिशिएंसी वायरस (एचआइवी)।

सरकार के टीका विकास अनुसंधान के लिए वित्त संघीय बजटों से भी उपलब्ध कराए जाते हैं। उदाहरण के लिए अमेरिका में यूएस आर्मी मेडिकल रिसर्च इंस्टिट्यूट ऑफ इंफेक्शस डिजिजेस हमारी सैन्य सेवा के सदस्यों को जैविक खतरों से बचाने के लिए टीकों के विकास पर काम करता है। अमेरिका में नेशनल इंस्टिट्यूट्स ऑफ हेल्थ, द नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ऐलर्जी एंड इंफेक्शस डिजीजेस (एनआइएआइडी) नए टीकों के विकास के लिए बुनियादी और ऐप्लाइड अनुसंधान को बढ़ावा देते और संचालित करते हैं।

टीके की सुरक्षा व प्रभावोत्पादकता के मूल्यांकन के लिए संपन्न किए जाने वाले क्लिनिकल परीक्षणों पर संघीय सरकारों के भीतर काम करने वाली नियामक एजेंसियों की नजर रहती है। इन एजेंसियों के पास वैज्ञानिकों व चिकित्सकों का समूह होता है, जो संभावित टीकों का मूल्यांकन करते हैं तथा क्लिनिकल अध्ययनों को मंजूरी देते हैं और उनकी निगरानी करते हैं। ये पदों के लिए प्रायः उच्च डिग्री करने की आवश्यकता होती है।

जन-स्वास्थ्य रोजगार,जिन्हें शहर, राज्य/प्रांतीय या संघीय स्तरों पर हासिल किया जा सकता है, लोगों को टीके लगाने पर केंद्रित होते हैं तथा उनके लिए जन-स्वास्थ्य में उच्च डिग्री की आवश्यकता होती है।

गैर-लाभ संचालित टीकों के विकास के कार्य ग्लॉबल वैक्सींस द्वारा संचालित किए जाते हैं, जो अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना में स्थित कैरोलिना वैक्सीन इंस्टिट्यूट के सहयोग से संपन्न किए जाते हैं। वर्ष 2002 में स्थापित इस संगठन का उद्देश्य है विकासशील देशों में पाए जाने वाली बीमारियों के लिए टीको का विकास करना। अन्य संगठन जैसे कि गावी व विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्युएचओ) दुनिया भर में जरूरतमंद लोगों को टीके उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहे हैं। इन एजेंसियों में टीके से जुड़े कई रोजगार उपलब्ध होते हैं और वे प्रयोगशाला अनुसंधान कार्यों से लेकर सार्वजनिक नीति व संचार जैसे क्षेत्रों में उपलब्ध होते हैं।

बुनियादी वैज्ञानिक अनुसंधान

बुनियादी अनुसंधान जैव-रसायन व उन भौतिक गुणों पर केंद्रित होते हैं, जिनका इस्तेमाल रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्म जीव अपने मेजबान जीव को नुकसान पहुंचाने में करते हैं। ऐसे अनुसंधान सूक्ष्मजीवों के जैव-भौतिकी अभिलक्षणों पर भी विचार करते हैं, जिनका इस्तेमाल रोग प्रक्रिया को रोकने या बाधित करने वाले टीकों या ड्रग्स में किया जा सकता है। टीका विकास चक्र के इस हिस्से को बुनियादी या पूर्व-क्लिनिकल अनुसंधान के रूप में जाना जाता है।

आमतौर पर एक वैज्ञानिक जिसके पास कोशिकीय व आण्विक जीव-विज्ञान,जैव-रसायन, या सूक्ष्म जीव-विज्ञान में डॉक्टरेट की डिग्री होती है, वह इन अध्ययनों का नेतृत्व करता है; हालांकि कई प्रकार के अनुसंधान कार्यों को अनुसंधान सहायकों द्वारा ही संपन्न किया जाता है, जिन्हें समान विषयों में केवल बीएस की ही डिग्री होती है। टीका विकास अनुसंधान के मामले में, अनुसंधान से जुड़े रोजगारों में कल्चर में सेल लाइंस (एक सेल लाइन एक क्लोन या क्लोनों का समूह होती है, जिसे किसी कल्चर में उगाया जाता है और एकल कोशिका से प्राप्त किया जाता है और जिनकी कड़ी प्रयोगशाला दशाओं में अनिश्चित काल तक प्रसार किया जा सकता है) की वृद्धि करवाना, डीएनए का क्लोन बनाना, या जांच-परख करना (प्रयोगशाला परीक्षण जो प्रोटीनों, वायरस तथा डीएनए की कुछ गतिविधि की मात्रा का निर्धारण करते और मापते हैं) शामिल रहते हैं। बुनियादी अनुसंधान रोजगार विशेष प्रयोगशाला उपकरणों के परिचालन में विशेषज्ञ बनने के अवसर भी प्रदान कर सकते हैं, जैसे कि फ्लो साइटोमीटर्स, जो कोशिकाओं का मूल्यांकन के लिए लेजर्स का इस्तेमाल करते हैं।

सभी बुनियादी अनुसंधानों के लिए एक डेटा विश्लेषण चरण की आवश्यकता होती है, जो एक अन्य विशेषज्ञता क्षेत्र को निरूपित करता है: यह है डेटा प्रबंधन व विश्लेषण। ये ऐसे रोजगार हैं जिनके लिए प्रायः एक बीएस डिग्री की आवश्यकता होती है, बल्कि उच्च डिग्री की कोई आवश्यकता नहीं होती है।

ज्यादातर विश्वविद्यालय छात्रों को स्वयंसेवा देने या किसी प्रयोगशाला में थोड़े वजीफा पर काम करने की अनुमति देते हैं - इससे स्नातक करने के बाद एक अच्छी नौकरी पाने के लिए अहम प्रशिक्षण और उत्कृष्ठ अनुभव मिलते हैं। छात्रों के लिए उपयुक्त इन रोजगारों में तकनीशियन सहायक से लेकर, जिसमें छात्रों को केमिकल स्टॉक घोल बनाना होता है, कांच के बरतनों को धोना और कीटाणुनाशित करना और अनुसंधान जंतुओं की देखभाल करना शामिल हो सकता है, वरिष्ठ तकनीशियन तक शामिल रहता है, जो सेल लाइंस स्टॉक्स को बनाए रखता है, अनुसंधान जंतुओं का ध्यान रखता और प्रजनन करवाता है, प्रयोगशाला की आपूर्तियों को दुरुस्त रखना तथा उनके कार्यों में प्रयोग करना भी शामिल हो सकता है।

जब यह लगता है कि कोई टीका चिकित्सीय इस्तेमाल के लिए एक गंभीर माध्यम है, तब प्रॉजेक्ट टीम इसे विकास चरण, या उन्नत विकास चरण में ले जाता है। विकास में जिन वैज्ञानिकों के पास निर्माण इंजीनियरिंग में उच्च डिग्री होती है, वे और उनके सहायक बड़े पैमाने पर टीके के उत्पादन के लिए सर्वोत्तम विधि पर कार्य करते हैं। यहां भी पीएचडी स्तर के वैज्ञानिक मुख्यतः इन अनुसंधानों के प्रमुख होते हैं, पर ऐसे कई रोजगार होते हैं, जो बीएस डिग्री वालों के लिए होते हैं।

 

क्लिनिकल परीक्षण (नैदानिक परीक्षण)

एक उम्मीदवार टीका जो पूर्व-क्लिनिकल अनुसंधान तथा उन्नत विकास चरण से सफलतापूर्वक बाहर निकल आता है, उसे मानव समुदाय पर क्लिनिकल परीक्षण किए जाने के योग्य माना जाता है। क्लिनिकल परीक्षण के क्षेत्र में कई प्रकार की नौकरियां और रोजगार शामिल होते हैं। ये क्लिनिकल परीक्षण प्रायः मेडिकल डॉक्टर्स (एमडी) तथा पीएचडी टीम नेतृत्व द्वारा संचालित किए जाते हैं; हालांकि इन परीक्षणों में कई ऐसे कार्य होते हैं जो बीएस या एमएस डिग्री वालों लोगों के लिए होते हैं। उदाहरण के लिए क्लिनिकल सहयोगी क्लिनिकल स्थलों के साथ काम कर सुनिश्चित करते हैं कि सही प्रोटोकोल का पालन किया जाए; नियामक पदों पर कार्य करने वाले कर्मचारी यह सुनिश्चित करते हैं कि परीक्षन सरकारी नियमनों के अनुरूप हो; सांख्यिकी कर्मचारी परीक्षण डेटा पर काम करते हैं; और मेडिकल लेखक ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं, जिनमें डॉक्टरों तथा रोगियों के लिए परीक्षण के विवरण मौजूद रहते हैं और साथ ही ये एफडीए के लिए भी कई दस्तावेज पेश करते हैं।

 

विश्वविद्यालय, सरकार व उद्योग जगत में अनुकूल रोजगार

बुनियादी टीका अनुसंधान विश्वविद्यालय, सरकार व उद्योगों के स्थलों पर संपन्न किया जा सकता है, पर इनमें से प्रत्येक व्यवस्था के अपने कुछ अंतर होते हैं। उद्योग में टीम के लोग बड़े बजटों पर भरोसा कर सकते हैं, पर उन्हें कड़ी समय-सीमाओं का पालन करना पड़ सकता है; उदाहरण के लिए एक जांच-परख विकसित करने और उसकी व्यवस्था बनाने में समय खर्च करने के बजाए यहां पहले से विकसित असे किट (जांच-परख किट) पर धन खर्च करने की प्रवृत्ति देखी जाती है। किसी विश्वविद्यालय की प्रयोगशाला में धन काफी सीमित होते हैं, समयसीमा कम कड़ी होती है और इसलिए ऐसा प्रयोगशाला खरीदने के बजार अपना खुद का असे का इन-हाउस विकास कर सकता है।

किसी कंपनी की अनुसंधान मांग अधिक लक्षित होती है - यदि टीका काम नहीं करता है, तो एक वैज्ञानिक अगली परियोजना पर निकल जाता है, जबकि किसी अकादमिक प्रयोगशाला में समस्याओं को बारीकी से देखने सा समय होता है। कुछ अनुसंधानकर्ता दावा करते हैं कि विश्वविद्यालय का माहौल उन्हें किसी के निरीक्षणों पर रचनात्मक रूप से काम करने की अधिक आजादी देता है।

उद्योग में प्रायः अधिक टीम वर्क की आवश्यकता होती है, जिसमें किसी परियोजना के विभिन्न अंगों को विभिन्न समूहों द्वारा एक-साथ संचालित किया जाता है, जबकि किसी अकादमिक प्रयोगशाला में कार्यरत कोई वैज्ञानिक परियोजना के सभी अंगों के बीच संचालन करने वाला अकेला व्यक्ति हो सकता है। दोनों व्यवस्थाओं की चुनौती होती है रचनात्मक विज्ञान तथा सभी व्यवसाय प्रबंधन के बीच संतुलन साधना, जो वित्त पाने, बजट का प्रबंधित करने तथा अन्य वैज्ञानिकों या सहायकों की निगरानी करने से जुड़ा हो सकता है।

टीके का अनुसंधान वैज्ञानिकों को ऐसी परियोजनाओं पर काम करने का अवसर प्रदान करता है, जो प्रत्यक्ष रूप से व्यक्तियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हों, चाहे यह सीधा प्रयोगशाला बेंच पर काम करती हो, किसी प्रॉडक्शन लाइन पर या किसी क्लिनिकल परीक्षण को सहायता प्रदान करने के रूप में कार्य करती हो। सभी स्थितियों में उच्च शिक्षा वह आवश्यक मार्ग है किसके जरिए टीके के अनुसंधान क्षेत्र में नौकरी करने का लक्ष्य पूरा किया जा सकता है।


स्रोत

GAVI. http://www.gavi.org/ 14 मार्च 2017 को प्रयुक्त।

Global Vaccines http://www.globalvaccines.org/content/about+global+vaccines%2C+inc./19651 14 मार्च 2017 को प्रयुक्त।

National Institute of Allergy and Infectious Diseases, National Institutes of Health.  http://www.niaid.nih.gov 14 मार्च 2017 को प्रयुक्त।

U.S. Army Medical Research Institute of Infectious Diseases, U.S. Army Medical Department. http://www.usamriid.army.mil/ 14 मार्च 2017 को प्रयुक्त।

विश्व स्वास्थ्य संगठन। http://www.who.int/about/en/ 14 मार्च 2017 को प्रयुक्त।

अंतिम अपडेट 14 मार्च 2017