गलसुआ

गलसुआ एक ऐसी बीमारी है जो जीनस रुबेलावायरस के वायरस के कारण होता है। यह दुनिया के उन हिस्सों में होने वाली एक सामान्य तीव्र बीमारी है जहां गलसुआ के टीके का प्रचलन नहीं है।

लक्षण

गलसुआ के लक्षणों में बुखार, सांस की समस्याएं होती हैं, और विशेष रूप से काम के नीचे लार ग्रंथियों में सूजन होता है। प्रभावित ग्रंथियों को पैरोटाइड ग्रंथि (उपकर्ण ग्रंथि) कहा जाता है, सूजन को पैरोटाइटिस कहा जाता है। हालांकि, पैरोटाइटिस गलसुआ का सबसे आसानी से पहचाना जाने वाला लक्षण है, यह केवल 30-40% मामलों में होता है। गलसुआ से पीड़ित 20% लोगों में हो सकता है कि कोई लक्षण न दिखाई दे।

वायरस के संपर्क में आने के प्राय: दो से तीन सप्ताह बाद लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

प्रसार

गलसुआ का वायरस श्वसन के छींटों द्वारा फैलता है। ये वायु जनित भी हो सकते हैं जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता है, छींकता है या बात करता है। इसके अलावा, कोई व्यक्ति उन स्पर्शी सतहों द्वारा भी वायरस के संपर्क में आ सकता है जो संक्रमित बूंदों द्वारा संदूषित हैं। पैरोटाइटिस प्रकट होने से बहुत दिन पहले की अवधि के दौरान संक्रमित व्यक्तियों को अत्यधिक संक्रामक माना जाता है (यदि यह उत्पन्न हो), और यह पहले प्रकटन के बाद पांचवें दिन तक चलता रहता है। किसी रोगी से दूसरे व्यक्ति को वायरस फैलने से रोकने के लिए, पैरोटाइटिस शुरु होने के बाद पांच दिनों तक अलग रहने की अनुशंसा की जाती है।

गर्म देशों में जाड़े के अंत में या बसंत के शुरुआत में गलसुआ अपने चरम पर होता है। गर्म देशों में, यह सालों भर होता है।

उपचार और देखभाल

गलसुआ का कोई प्रत्यक्ष इलाज नहीं है। बुखार कम करने के प्रयास के साथ-साथ सहयोगात्मक देखभाल प्रदान किया जा सकता है।

जटिलताएं

गलसुआ प्राय: एक हल्का रोग होता है, लेकिन यह कष्टप्रद होता है और जटिलताएं विचित्र होती हैं। इसमें शामिल हैं मेनिंजाइटिस; प्रौढ़ पुरुषों में अंडकोषीय (टेस्टिक्युलर) प्रदाह, उन्हें भी लगभग आधा अनुभव हो सकता है जिन्हें कुछ सीमा तक अंडकोषीय क्षीणता है; प्रौढ़ महिलाओं में अंडाशयों और स्तनों का प्रदाह; और एक या दोनों कानों में स्थायी बहरापन। गलसुआ का टीका विकसित होने से पहले, यह बीमारी बच्चों में बहरापन का एक प्रमुख कारण था।

कुछ शोध यह भी बताते हैं कि उन गर्भवती महिलाओं में गर्भपात की संभावना बढ़ जाती है जो अपनी पहली तिमाही में गलसुआ से संक्रमित होती हैं।

उपलब्ध टीके

गलसुआ का टीका एक दुर्बलीकृत लाइव वायरस का टीका है। अलग-अलग गलसुआ वायरल स्ट्रैंस पर आधारित अनेक भिन्न-भिन्न गलसुआ टीके दुनिया भर में उपलब्ध हैं। गलसुआ का टीका प्राय: खसरा, गलसुआ, और रुबेला टीका (MMR) के कॉम्बिनेशन में दिया जाता है या खसरा, गलसुआ, और रुबेला, और छोटी चेचक (MMRV) के कॉम्बिनेशन में दिया जाता है। कम प्रचलित रूप से, यह दूसरे देशों में अन्य फॉर्मुलेशन में उपलब्ध हो सकता है।

टीका की अनुशंसाएं

बहुत से औद्योगीकृत देशों, और कुछ विलासशील देशों ने अपने राष्ट्रीय प्रतिरक्षण कार्यक्रम में गलसुआ-युक्त टीके को शामिल किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस बात की अनुशंसा की है कि गलसुआ-युक्त टीके का प्रयोग उन देशों में किया जाना चाहिए जहां बाल्यावस्था प्रतिरक्षण कार्यक्रम पूरी तरह से स्थापित हैं और जिनका खसरा और रुबेला टीकाकरण की व्यापकता उच्च है। गलसुआ-युक्त टीका सर्वाधिक प्रभावी होता है जब दो खुराकों, पहली खुराक 12-15 महीने की आयु में और दूसरी खुराक 4-6 वर्ष की आयु में दी जाती है।


स्रोत और अतिरिक्त पठन सामग्री

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अंतिम अपडेट 28 मार्च 2017