पीत ज्वर

पीत ज्वर (YF) एक ऐसा वायरल रोग है जो संक्रमित मच्छर के काटने द्वारा मनुष्यों में फैलता है और साथ ही कुछ अन्य प्राइमेट्स और मनुष्यों के बीच फैलता है। पीत ज्वर लैटिन अमेरिका और अफ्रीका के क्षेत्रों में स्थानिक है, जबकि आयातित मामले दुनिया भर में फैले हुए हैं। लगभग 84,000-170,000 मामले और लगभग 60,0000 मौंतें पीत ज्वर के कारण हर साल होती हैं।

लक्षण और प्रेरक कारक

पीत ज्वर के लक्षण हैं बुखार, कंपकंपी, मिचली, उल्टी, मांसपेशी का दर्द, पीठ दर्द और सिर दर्द। इस रोग का कोई इलाज नहीं है। लक्षण प्राय: अनेक दिनों तक बने रहते हैं। कुछ रोगियों में शुरुआती लक्षणों में धूमिल होने के तुरंत बाद लक्षण वापस प्रकट हो सकते हैं। इस दूसरी चरण पर चर्चा नीचे की गई है।

पीत ज्वर के कारण उत्पन्न होने वाले वायरस को साधारण रूप से पीज ज्वर वायरस कहा जाता है, इसे पीलिया (जिसके कारण त्वचा पीली पड़ जाती है) का नाम दिया गया है जो कुछ लोगों को प्रभावित करता है। यह फ्लैविविरिडिया वायरस परिवार से संबंधित है।

प्रसार

YF का मनुष्यों में प्रसार संक्रमित मच्छरों के काटने से होता है। यह सीधे व्यक्ति से व्यक्ति में नहीं फैलता।

रोग के तीन मुख्य प्रकार होते हैं:

  • सिल्वैटिक पीत ज्वर (जिसे “जंगल येलो फीवर” भी कहा जाता है) तब उत्पन्न होता है जब रोग जंगली मच्छरों द्वारा संक्रमित बंदरों से मनुष्यों में हस्तांतरित होता है। मनुष्यों के जंगल के क्षेत्र में जाने पर यह रोग होता है।
  • मध्यवर्ती पीत ज्वर—आधुनिक अफ्रीका में सर्वाधिक सामान्य प्रकार का प्रकोप - तब उत्पन्न होता है जब अर्ध-घरेलू मच्छर (जो बंदरों और मनुष्यों दोनों को संक्रमित करते हैं) उन क्षेत्रों में मौजूद होते हैं जहां वे आमतौर पर मनुष्यों के संपर्क में आते हैं।
  • शहरी पीत ज्वर तब उत्पन्न होता है जब घरेलू मच्छरों की एईडीज एजेप्टाई प्रजाति मनुष्यों के बीच वायरस का प्रसार करता है, अन्य प्राइमेट्स के जरिए प्रसार किए बिना।

उपचार और देखभाल

पीत ज्वर का कोई प्रत्यक्ष इलाज नहीं है। सहयोगात्मक देखभाल प्रदान किया जा सकता है, साथ ही रोगी को दर्द कम करने और रोग से संबंधित बुखार को कम करने का प्रयास किया जा सकता है। दर्द में आराम के लिए दवाइयों का चयन सावधानी से किया जाना चाहिए, क्योंकि कुछ नन-स्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लामेंट्री दवाओं (जिसमें एस्पिरिन होता है) से रक्तस्राव का खतरा हो सकता है। 

जटिलताएं और मृत्यु दर

यद्यपि पीत ज्वर के रोगी लक्षणों के 3-4 दिनों में ठीक हो जाते हैं, वहीं लगभग 15% रोगी सुधार के बाद बीमारी की दूसरी चरण में प्रवेश कर जाते हैं। इस दूसरी चरण में दुबारा तेज बुखार, और पीलिया (जॉन्डिस) होता है; पेट दर्द और उल्टी; मुंह, नाक, आंख या पेट से खून निकलना; और किडनी की कार्यप्रणाली में विकृति आती है। दूसरी चरण से पीड़ित लगभग आधे रोगियों की मौंत हो जाती है।

रोकथाम: मच्छर रोधी विधियां, उपलब्ध टीके, और टीकाकरण अभियान

वर्ष 1900 में युनाइटेड स्टेट्स आर्मी के शोधकर्ताओं ने इस बात की खोज की कि पीत ज्वर के लिए मच्छर प्रसार का वाहक होते हैं। रोग लगने के लिए, किसी व्यक्ति को संक्रमित मच्छर का काटना आवश्यक है - और मच्छर को खुद वायरस से ग्रसित होने के बाद एक निश्चित समय अवधि बीतना अनिवार्य है। इससे वायरस के प्रसार के लिए अवसर की खिड़की सापेक्षिक रूप से छोटी होती है, यद्यपि वह खिड़की में बड़ी असुरक्षित आबादी वाले क्षेत्र में और मच्छरों की भारी गतिविधि वाले क्षेत्र में उल्लेखनीय रूप से वृद्धि होती है।

दुर्भाग्यवश, व्यक्ति के  एक बार पीत ज्वर से संक्रमित होने के बाद, मानक सहयोगी देखभाल करने और रोगी को यथासंभव आराम पहुंचाने की कोशिश करने के अलावा कोई दूसरा इलाज नहीं होता। इसलिए, मच्छर निरोधी विधियां और टीकाकरण रोग के खिलाफ उपलब्ध बेहतरीन हथियार हैं।

पीत ज्वर का टीका 30 वर्ष या इससे अधिक अवधि के लिए प्रतिरक्षा प्रदान करता है - संभवत: जीवन भर - और टीका लिए हुए 95% व्यक्तियों को, साथ ही यह रोग के खिलाफ एक हफ्ते के अंदर सुरक्षात्मक प्रतिरक्षा प्रदान करता है। टीका लेने वाले लगभग 90% लोगों को टीकाकरण की एक ही खुराक से रोग के खिलाफ जीवन भर प्रतिरक्षा क्षमता हासिल हो सकती है।

पीत ज्वर का टीकाकरण विशेष रूप से उन क्षेत्रों में किया जाता है जहां रोग स्थानिक होते हैं, लेकिन यह उन लोगों के लिए भी उपलब्ध (और कभी-कभी जरूरी होता है) है जो उन क्षेत्रों में जाते हैं जहां वायरस अब भी व्यापक रूप से फैला है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा प्रस्तुत किए गए हाल की सांख्यिकी में वर्ष 2013 में उन देशों में प्रतिरक्षण का दायरा लगभग 41% दिखाया गया है जहां इस रोग के प्रकोप का खतरा मौजूद है। यह 1988 की तुलना में बहुत अधिक है, जब रोग अपने चरम स्थिति में था जहां दुनिया भर में 5 मिलियन मामले उत्पन्न हुए थे और प्रतिरक्षण का दायरा 5% से कम था। हालांकि, WHO की सतर्कता के अनुसार जोखिम वाली आबादी को सुरक्षित करने हेतु प्रकोप की रोकथाम के लिए प्रभावित क्षेत्रों में 60-80% की सीमा आवश्यक है।

WHO ने येलो फीवर इनिशिएटिव नामक पीत ज्वर टीकाकरण प्रयास की अगुआई की जिसे देश की सरकारों और युनिसेफ दोनों से समर्थन प्राप्त हुआ। इसमें विशेष रूप से 12 अफ्रीकी देशों पर ध्यान दिया जाता है जहां रोग की दरें बहुत अधिक हैं। इस कार्यक्रम में विशाल जनसंख्या के टीकाकरण अभियानों को उन क्षेत्रों में क्रियान्वित किया गया है जहां नौ महीने या इससे अधिक आयु के लोगों को रोग का उच्च जोखिम है। यह समूह निगरानी का काम भी करता है और प्रकोप के लिए प्रतिक्रिया भी देता है। अधिक जानकारी WHO की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

टीकाकरण की अनुशंसाएं

WHO ने इस बात की अनुशंसा की है कि सभी YF स्थानिक देशों को अपने नियमित प्रतिरक्षण कार्यक्रमों में YF टीका को शामिल करना चाहिए। इन क्षेत्रों में 9-12 महीने की आयु में टीकाकरण की सलाह दी जाती है। समूह ने इस बात की भी अनुशंसा की है कि YF का टीका उन सभी गैर-टीकाकृत यात्रियों को दिया जाना चाहिए जिसकी आयु 9 महीने और इससे अधिक है जो जोखिम वाले क्षेत्रों में जा रहे हैं।


स्रोत

विश्व स्वास्थ्य संगठन। Fact sheet: yellow fever. http://www.who.int/mediacentre/factsheets/fs100/en/  20/03/2017 को प्रयुक्त.

विश्व स्वास्थ्य संगठन। Global immunization data. Http://www.who.int/immunization/monitoring_surveillance/global_immunization_data.pdf  20/03/2017 को प्रयुक्त।

विश्व स्वास्थ्य संगठन। Yellow fever: WHO vaccine position paper (280 KB). July 2013. http://www.who.int/wer/2013/wer8827.pdf?ua=1 20/03/2017  को प्रयुक्त।

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अंतिम अपडेट 20 माच 2017